ध्येय IAS निदेशक (Dhyeya IAS Directors)


ध्येय IAS निदेशक (Dhyeya IAS Directors)


श्री विनय कुमार सिंह (सीईओ और फाउंडर)

हम इस मंत्र में विश्वास रखते हैं कि प्रत्येक व्यक्ति अद्वितीय है_ प्रत्येक व्यक्ति निपुण है एवं प्रत्येक व्यक्ति में असीमित क्षमता है। ध्येय IAS हमेशा से आत्मप्रेरणादायक मार्गदर्शन को प्रोत्साहित करता रहा है जिससे कि छात्रें के भीतर ज्ञान का सृजन हो सके। शिक्षा प्रदान करने का उद्देश्य ज्ञान के सृजन, प्रसार एवं अनुप्रयोग को एकीकृत रूप में पिरोकर एक सह-क्रियाशील प्रभाव उत्पन्न करना है। ध्येय IAS हमेशा से ही छात्रें के भीतर मानवीय मूल्यों एवं सत्यनिष्ठा को विकसित करने का पक्षधर रहा है जिससे कि उनमें निर्णय लेने की क्षमता का विकास हो और वे एक ऐसी परिस्थिति का सृजन करें जो न सिर्फ उनके लिए बल्कि समाज, राष्ट्र और विश्व के लिए भी बेहतर हो। ध्येय IAS नये और प्रभावशाली तरीको से अपने इस मिशन को पूरा करने के लिए प्रत्येक छात्र को हर प्रयास में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है। इसके लिए हम निरंतर और निर्बाध रूप से अपने अध्ययन कार्यक्रम और शिक्षण पद्धति में परिवर्तन एवं परिमार्जन करते रहते हैं।

सिविल सेवा परीक्षा का पाठ्यक्रम प्रतियोगी छात्रें में केवल ज्ञान के प्रति जुनून ही नहीं उत्पन्न करता है बल्कि यथार्थ जीवन में उसका प्रयोग भी सिखाता है। ध्येय IAS प्रतियोगी छात्रें के सम्पूर्ण व्यक्तित्व का विकास करता है। साथ ही उनमें ईमानदारी एवं सत्यनिष्ठा जैसे मूल्यों का भी सृजन करता है।

श्री क्यू एच खान (प्रबंध निदेशक)

ध्येय IAS एक ऐसा संस्थान है जिसका लक्ष्य हमेशा से ही छात्रें के समग्र विकास का रहा है। हमारे संस्थान के शिक्षक अपने-अपने विषय के विशेषज्ञ होते हैं जिससे कि छात्रें को प्रत्येक विषय में अधिकतम मदद प्राप्त हो सके। यह एक ऐसा बहुमुखी संस्थान है जहां छात्रें को उच्चस्तरीय कक्षाओं और समृद्धशाली अध्ययन सामग्री के साथ-साथ हरसंभव सहायता उपलब्ध करायी जाती है।

आज ध्येय IAS सिविल सेवा परीक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी पहचान रखता है, क्योंकि हम उच्चस्तरीय एवं गुणवत्तापूर्ण प्रदर्शन में विश्वास रखते हैं। हम छात्रें को ज्ञान की परिधि बढ़ाने के लिए निरंतर प्रोत्साहित करते रहते हैं ताकि वे पाठ्यक्रम के दायरे से सदैव दो कदम आगे रहें। हमारा मुख्य उद्देश्य छात्रें को उनकी आन्तरिक क्षमता का बोध कराना होता है जिससे कि वे अपनी एक अलग पहचान बनाकर कल के समाज का कीर्तिमान बन सकें।