यूपीएससी आईएएस मुख्य परीक्षा के लिए उत्तर लेखन अभ्यास कार्यक्रम: पेपर - II (सामान्य अध्ययन - 1) - 21, दिसंबर 2018


यूपीएससी आईएएस मुख्य परीक्षा के लिए उत्तर लेखन अभ्यास कार्यक्रम (Answer Writing Practice for UPSC IAS Mains Exam)


मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम:

  • प्रश्नपत्र-2: सामान्य अध्ययन-1: (भारतीय विरासत और संस्कृति, विश्व का इतिहास एवं भूगोल तथा समाज)

प्रश्न - ‘वर्तमान समय में ऐसे आर्थिक विकास की अपेक्षा की जा रही है, जो पर्यावरण को हानि न पहुँचाए।’भारत के संदर्भों में उन उपायों की चर्चा करें, जो अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचाए बगैर पर्यावरण की सुरक्षा के लिए भी कारगर साबित होंगे।

मॉडल उत्तर:

दृष्टिकोणः

  • विकास की नवीन अवधारणा का परिचय
  • हरित विकास व सतत विकास
  • मुख्य उपाय
  • निष्कर्ष

उत्तर

विकास की नई अवधारणा, ‘हरित आर्थिक विकास’ (Green Economic Growth) है, जहाँ पर्यावरण को क्षति पहुँचाए बगैर या नष्ट किए बिना ही विकास प्रक्रिया को संचालित किया जाता है। दूसरी ओर यहाँ यह भी अपेक्षा की जाती है कि पर्यावरण संरक्षण व उसमें सुधार के कारण अर्थव्यवस्था में होने वाले नवाचार व संवृद्धि दर प्रभावित न हो। विकास की यह अवधारणा ‘सतत विकास’ धारणीय विकास या हरित विकास के रूप में जानी जाती है। विकास की इस प्रक्रिया में वर्तमान आवश्यकताओं को पूर्ण करने के साथ-साथ भविष्य में आने वाली पीढ़ियों के लिए भी विकास के उसी स्तर को बनाए रखने हेतु पर्यावरणीय संसाधनों के अंधाधुंध दोहन के स्थान पर उसके संरक्षण व प्रबंधन के साथ आर्थिक वृद्धि की अपेक्षा की जाती है।

भारत प्रारंभिक काल से ही सतत विकास व हरित आर्थिक विकास की अवधारणा का पक्षधर रहा है, जिसे व्यवहारिक रूप प्रदान करने हेतु किये गए कुछ उपायों को इस प्रकार चिन्हित कर सकते हैं—

हरित ऊर्जा

  • पर्यावरणीय प्रदूषण व जीवाश्मी ईंधन के बढ़ते प्रयोग के संदर्भ में नवीकरणीय ऊर्जा श्रोतों, यथा-सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायो गैस आदि को बढ़ावा देकर हरित ऊर्जा को प्रेरित करना। भारत में सरकार द्वारा 2022 तक 175GW नव्यकरणीय ऊर्जा के उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
  • परिवहन के साधनों में मुख्यतः नवीन ईंधनों जैसे CNG, का प्रयोग तथा बैट्री से चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रयोग को बढ़ावा।
  • म्यूनिसिपल कचरे से ऊर्जा निर्माण उपक्रमों की स्थापना करना।
  • वाहनों के लिए ठै प्ट मानकों को प्रभावी बनाया जाना।

हरित नियमन/विधान

  • हरित बजटिंग का प्रावधान जिसके अंतर्गत विकास प्रक्रिया में पर्यावरणीय क्षति को अनुमानित करना अनिवार्य होगा।
  • परियोजनाओं की वहनीयता की जाँच में पर्यावरणीय प्रभाव मूल्याँकन को (EIA) अनिवार्य करना।
  • सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना तथा प्लास्टिक के प्रयोग को प्रतिबंधित करना जैसे फैसले पर्यावरणीय संरक्षण को बढ़ावा देते हैं।
  • इसके साथ ही परियोजनाओं हेतु पर्यावरणीय क्लीयरेन्स (Environmental clearance) को केवल अवरोध के रूप में नहीं बल्कि गंभीर व पारदर्शी रूप से प्रयोग में लाना।

हरित नगरीय नियोजन

  • नगरीय नियोजन में पर्यावरणीय संरक्षण को एक केन्द्रीय तत्व मानते हुए नगरों के अंतर्गत हरित बेल्ट का संरक्षण, जल निकायों जैसे-वेटलैन्ड, झील, नदियों आदि के संरक्षण को शामिल करना।
  • इसके साथ ही अपशिष्ट प्रबंधन को नगरीय नियोजन में शामिल करते हुए ठोस व तरल अपशिष्टों के निस्तारण हेतु एक प्रबंधन तंत्र स्थापित कर नगरों को हरित रूप दिया जा सकता है।
  • स्मार्ट सिटी, स्वच्छ भारत अभियान जैसे केन्द्रीय योजनाओं का उदाहरण यहाँ उल्लेखनीय है।

हरित कृषि

  • आर्गेनिक कृषि व ड्रीप सिंचाई जैसे प्रयोग कृषि को पर्यावरण संरक्षण से संबद्ध कर सकते हैं।
  • इन उपायों के द्वारा हम मृदा प्रदूषण, जल प्रदूषण व जल संसाधन के अंधाधुंध प्रयोगों को रोक सकते हैं।

निष्कर्ष

अतः हरित विकास के द्वारा पर्यावरण संरक्षण के साथ एक सतत व समावेशी विकास प्रक्रिया को बल प्रदान किया जा सकेगा। इसके अंतर्गत हरित ऊर्जा एवं तकनीकि में नवाचारों को प्रेरित कर अर्थव्यवस्था के संवृद्धि दर में एक निश्चित स्तर को भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।

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