यूपीएससी आईएएस और यूपीपीएससी मुख्य परीक्षा के लिए उत्तर लेखन अभ्यास कार्यक्रम: पेपर - II (सामान्य अध्ययन-1: भारतीय विरासत और संस्कृति, विश्व का इतिहास एवं भूगोल तथा समाज) - 26, नवंबर 2019


यूपीएससी आईएएस और यूपीपीएससी मुख्य परीक्षा के लिए उत्तर लेखन अभ्यास कार्यक्रम (Answer Writing Practice for UPSC IAS & UPPSC/UPPCS Mains Exam)


मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम:

  • प्रश्नपत्र-2: सामान्य अध्ययन-1: (भारतीय विरासत और संस्कृति, विश्व का इतिहास एवं भूगोल तथा समाज)

प्रश्न - ‘स्टील स्क्रैप नीति’ से आप क्या समझते हैं? स्क्रैप आधारित उद्योगों के समक्ष आने वाली चुनौतियों का उल्लेख करते हुए, स्टील स्कैप आधारित उद्योगों से होने वाले लाभों पर भी चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

मॉडल उत्तर:

  • चर्चा में क्यों हैं?
  • परिचय।
  • स्टील स्क्रैप पुनर्चक्रण नीति।
  • स्क्रैप - आधारित उद्योग द्वारा सामना की जाने वाली समस्याएं।
  • स्टील स्क्रेप आधारित उद्योगों के लाभ
  • निष्कर्ष

चर्चा में क्यों हैं?

  • इस्पात मंत्रालय ने स्टील स्क्रैप के वैज्ञानिक प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण के लिए भारत में धातु केंद्र स्थापित करने के लिए स्टील स्क्रैप पुनर्चक्रण नीति (SSRP) जारी की है।

परिचय

  • द्वितीयक क्षेत्र प्राथमिक कच्चे माल के रूप में स्क्रैप का उपयोग करता है। भारतीय स्टील उद्योग की एक प्रमुख विशेषता यहाँ छोटे स्टील उत्पादकों की उपस्थिति है, जो इस्पात निर्माण के लिए स्क्रैप का प्रयोग करते हैं।साथ हीऑटोमोबाइल शिप ब्रेंकिंग उद्योग मुख्य रूप से कच्चे माल के रूप में स्क्रैप का प्रयोग करते हैं।

स्टील स्क्रैप रिसाइक्लिंग नीति -

  • केन्द्रीय इस्पात मंत्रालय ने स्टील स्क्रैप के पुनर्चक्रण की नई नीति जारी की है। यह नीति निम्नलिखित उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए बनाई गई है।
  • इस्पात क्षेत्र में पुनर्चक्रण पर आधारित अर्थव्वयस्था को बढ़ावा देना
  • पुनर्चक्रण के लिए इस्पात (लौह और अलौह तथा अन्य गैर-धातु) से निर्मित वस्तुओं का ऐसी प्रक्रिया का इस्तेमाल करते हुए वैज्ञानिक तरीके से संग्रहण और निस्तारण, जो ऊर्जा बचत के साथ ही पर्यावरण के अनुकूल भी हों  
  • व्यवस्थित, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल तरीके से इस्पात से निर्मित वस्तुओं के कबाड़ का प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण।
  • सभी हितधारकों के साथ मिलकर एक जवाबदेह पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना।
  • गुणवत्ता वाले इस्पात उत्पादन के लिए उच्च गुणवत्ता वाले ऐसे लौह स्क्रैप का उत्पादन करना, जिससे आयात पर निर्भरता कम हो सके।
  • स्टील स्क्रैप के ढेर से भारतीय शहरों को मुक्त रखना और लौह स्क्रैप को पुन:  इस्तेमाल करने लायक बनाना।
  • पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी किए गए खतरनाक और अन्य अपशिष्टों का (प्रबंधन और उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाए जाने) से संबंधित नियम, 2016 के अनुरूप इस्पात के कबाड़ से निकलने वाले कचरे और अपशिष्ट पदार्थों के निस्तारण के लिए एक सक्षम तंत्र विकसित करना।
  • अधिकृत केन्द्रों द्वारा गैर-लौह स्क्रैप सहित सभी तरह के इस्पात कचरे के प्रसंस्करण और निस्तारण के लिए रिड्यूस, री-साईकल, रिकवर, रि-डिजाइन और रि-मेन्युफेक्चर के 6 प्रमुख सिद्धांतों को बढ़ावा देना।

स्क्रैप आधारित उद्योगों के समक्ष आने वाली समस्यायें

  • विभिन्न प्रकार के नए उत्पाद बनाने के लिए एल्युमिनियम, तांबा, स्टील पीतल और लोहे जैसी धातुओं का पुनर्नवीकरण किया जाता हैः इन उद्योगों के समक्ष आने वाली समस्यायें निम्नलिखित हैः-
  • कई बारउपलब्ध स्क्रैप की गुणवत्ता पर सवाल भी उठाया जाता है। अधिकांश समय डीलरों द्वारा स्क्रैप में अशुदिद्धयांको मिलाया जाता है ताकि मांग और आपूर्ति के अंतर को कम किया जा सके।
  • स्क्रैप डीलरों की एक मजबूत लॉबी है और इस क्षेत्र पर उनका बहुत अधिक नियंत्रण है। जिससे कई बार यह कर्टिलाइजेशन की ओर ले जाता है।
  • अधिक पर्यावरण के अनुकूल होने के लिए, उद्योग ‘शून्य प्रभाव, शून्य दोष’ (Zero effect, Zero defect) की नीति की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे है। इससे न्यूनतम अपव्यय और स्क्रैप की कम उपलब्धता हुई है।
  • स्टील स्क्रैप आधारित उद्योगों के लाभ
  • स्क्रैप नीति यह सुनिश्चित करेगी कि इस्पात उद्योग के लिए गुणवत्तापूर्ण स्क्रैप उपलब्ध हो।
  • स्क्रैप विद्युत भट्टियों के लिए एक महत्वपूर्ण इनपुट है। इसके बदले में, ये भटिट्टयां उच्च श्रेणी के स्टील का उत्पादन कर सकती है।
  • इससे बिना अशुद्धियों के उच्च ग्रेड स्टील के उत्पादन में मदद मिलेगी। तो, इस्पात के उत्पादन के लिए उपयोग किए जाने वाले बुनियादी कच्चे माल (लौह-अयस्क) को भविष्य में खपत के लिए बचाया जा सकता है।
  • भारत में उच्च श्रेणी के स्टील का उत्पादन किया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप न केवल स्क्रैप के प्रतिस्थापन का आयात किया जाएगा, बल्कि वर्तमान में आयात किए जाने वाले उच्च स्टील के प्रतिस्थापन का भी आयात किया जाएगा।
  • इसमें लाजिस्टिक सर्पोट, निराकरण और स्क्रैपिंग सेंटर जैसे क्षेत्रों में रोजगार सृजन की क्षमता में वृद्धि होगी।

निष्कर्ष -

  • स्टील स्क्रैप रिसासकलिंग नीति एक पुनचर्क्रण पर आधारित अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में एक स्वागत योग्य कदम है। हालांकि नीति में स्क्रैप केंद्रों की स्थापना की परिकल्पना नहीं की गई है, लेकिन पहले से उपलब्ध संसाधनों को बेहतर ढंग से व्यवस्थित करने की आवश्यकता है क्योंकिइसके पश्चात् स्क्रैप अब हमारी अर्थव्यवस्थाके लिए महत्वपूर्ण बन जाएगा।

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