यूपीएससी आईएएस मुख्य परीक्षा के लिए उत्तर लेखन अभ्यास कार्यक्रम: पेपर - III (सामान्य अध्ययन - 2) - 02, अगस्त 2018


यूपीएससी आईएएस मुख्य परीक्षा के लिए उत्तर लेखन अभ्यास कार्यक्रम (Answer Writing Practice for UPSC IAS Mains Exam)


मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम:

  • पेपर - III (सामान्य अध्ययन - 2): (शासन व्यवस्था, संविधान, राजव्यवस्था, सामाजिक न्याय तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध)

प्रश्न - संसद में मानव तस्करी (ननवारण, सरंक्षण और पुनर्वास) बिल, 2018 लाने की आवश्यकता क्यों महसूस की गयी? इस विधेयक की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख करते हुए भारत में इस कानून को लागू करने के प्रभावो पर भी चर्चा करें। (250 शब्द)

मॉडल उत्तर:

दृष्टिकोण

  • चर्चा में क्यों है?
  • आवश्यकता क्यों है?
  • प्रमुख विशेषताएँ
  • प्रभाव
  • निष्कर्ष

चर्चा में क्यों है?

  • महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गाँधी द्वारा 18 जुलाई 2018 को लोकसभा में मानव तस्करी (निवारण, संरक्षण और पुनर्वास) बिल 2018 पेश किया गया।
  • नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने बच्चों की तस्करी एवं बच्चों के हो रहे यौन शोषण के खिलाफ वर्ष 2017 में 12000 कि.मी. की भारत यात्रा की।

आवश्यकता क्यों है?

  • मनुष्यों की तस्करी, मानवाधिकारों का उल्लंघन करने वाला तीसरा सबसे बड़ा संगठित अपराध है। आँकड़े बताते हैं कि आठ बच्चे प्रति घंटे गायब हो जाते हैं, चार का यौन शोषण होता है तथा 2 का बलात्कार हो जाता है।
  • संवैधानिक सुरक्षा उपायों यथा–अनु. 23, 45 शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009, POCSO अधिनियम 2012, किशोर न्याय अधिनियम-2015 आदि के बावजूद भी देश में मानव तस्करी प्रचलित है।
  • भारत में इस प्रकार के अपराध से निपटने के लिए कोई विशिष्ट कानून नही है।

प्रमुख विशेषताएँ

  • राष्ट्रीय तस्करी रोधी ब्यूरोः बिल तस्करी के मामलों की जाँच और विभिन्न प्रावधानों को लागू करने के लिए राष्ट्रीय तस्करी रोधी ब्यूरो (नेशनल एंटी ट्रैफिकिंग ब्यूरो) की स्थापना करता है। ब्यूरो में पुलिस अधिकारियों के अतिरिक्त दूसरे अधिकारी भी शामिल होंगे, जैसी जरूरत होगी। यह ब्यूरो बिल के अंतर्गत आने वाले ऐसे किसी भी अपराध की जाँच कर सकता है जिसे दो या उससे अधिक राज्यों ने रेफर किया हो। इसके अतिरिक्त ब्यूरो (i) राज्य सरकारों से जाँच में सहयोग देने का अनुरोध कर सकता है, या (ii) केन्द्र सरकार की अनुमति से जाँच और ट्रायल के लिए किसी मामले को राज्य सरकार को ट्राँसफर कर सकता है।
  • ब्यूरो के कार्यः ब्यूरो के मुख्य कार्यों में निम्नलिखित शामिल हैंः (i) जिन रूट्स के बारे में जानकारी है, (नोन रूट्स) उनकी निगरानी और मॉनिटरिंग करना, (ii) सोर्स, ट्राँसिज और डेस्टिनेशन प्वाइंट्स पर निगरानी रखना, एनफोर्समेंट और बचाव संबंधी कदम उठाना, (iii) कानून का प्रवर्तन करने वाली एजेंसियों और गैर सरकारी संगठनों तथा दूसरे स्टेकहोल्डर्स के बीच समन्वय स्थापित करना, और (iv) खुफिया सूचनाओं को साझा करने और परस्पर कानूनी सहायता के लिए विदेशी अथॉरिटीज के साथ अंतरराष्ट्रीय समन्वय बढ़ाना।
  • राज्य स्तरीय एंटी ट्रैफिकिंग अधिकारीः बिल के अंतर्गत राज्य सरकार राज्य नोडल अधिकारी को नियुक्त करेगी। उसकी निम्नलिखित जिम्मेदारियाँ होगीः (i) राज्य एंटी ट्रैफिकिंग कमिटी के निर्देशों के अनुसार बिल के अंतर्गत फॉलो अप की कार्रवाई करना, और (ii) राहत और पुर्नवास सेवाएँ प्रदान करना। राज्य सरकार हर जिले में एंटी ट्रैफिकिंग पुलिस अधिकारियों को भी नामित करेगी, जोकि जिले में ट्रैफिकिंग से संबंधित सभी मामलों से निपटेंगे।
  • एंटी ट्रैफिकिंग यूनिट्सः बिल में जिला स्तर पर एंटी ट्रैफिकिंग यूनिट्स (एटीयूज) बनाने का भी प्रावधान है। एटीयू तस्करी को रोकेगी और लोगों का बचाव करेगी। पीड़ितों एवं गवाहों को सुरक्षा देगी। तस्करी के अपराधों में जाँच एवं कानूनी कार्रवाई करेगी। जिन जिलों में एटीयू फंक्शनल नहीं है, वहाँ स्थानीय पुलिस स्टेशन द्वारा यह कार्य किया जाएगा।
  • एंटी ट्रैफिकिंग राहत और पुर्नवास कमिटीः बिल राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तरों पर एंटी ट्रैफिकिंग राहत और पुर्नवास कमिटी (एटीसीज) के गठन का प्रावधान करता है। कमिटी निम्नलिखित के लिए जिम्मेदार होगीः (i) पीड़ितों को मुआवजा देना, (ii) पीड़ितों को अपने देश भेजना, और (iii) समाज में पीड़ितों को दोबारा एकीकृत करना, इत्यादि।
  • सर्च और बचावः एंटी ट्रैफिकिंग पुलिस अधिकारी या एटीयू उन लोगों का बचाव कर सकते हैं जिनके तस्करी का शिकार होने की आशंका है। मेडिकल जाँच के लिए उन्हें मजिस्ट्रेट या बाल कल्याण कमिटी के सामने पेश किया जाएगा। जिला एटीसी बचाए गए लोगों को राहत और पुर्नवास सेवाएं प्रदान करेगी।
  • संरक्षण और पुर्नवासः बिल केन्द्र या राज्य सरकार से यह अपेक्षा करता है कि वे प्रोटेक्शन हाउस बनाएंगी। यहाँ पीड़ितों को शेल्टर, खाना, काउंसिलिंग और मेडिकल सेवाएं दी जाएंगी। इसके अतिरिक्त केंद्र या राज्य सरकार हर जिले में रीहैबलिटेशनल होम्स का रखरखाव करेंगी, जिससे पीड़ितों का लंबे समय के लिए पुनर्वास किया जा सके। पीड़ितों का पुर्नवास इस बात पर निर्भर नहीं होगा कि आरोपी के खिलाफ क्रिमिनल कार्यवाही शुरू की गई है, या उस कार्यवाही का क्या परिणाम निकला है। केंद्र सरकार एक रीहैबलिटेशन फंड बनाएगी जिसे इन प्रोटेक्शन और रीहैबलिटेशन होम्स को बनाने में इस्तेमाल किया जाएगा।
  • एक निश्चित समय में ट्रायलः बिल में हर जिले में ऐसी नामित अदालतों को गठित करने का प्रावधान है, जोकि एक साल में ट्रायल पूरा करने का प्रयास करेंगी।
  • सजाः बिल विभिन्न अपराधों, जैसे (i) लोगों की तस्करी, (ii) तस्करी को बढ़ावा देने, (iii) पीड़ित की पहचान का खुलासा करने, और (iv) तस्करी के गंभीर रूप (एग्रेवेटेड ट्रैफिकिंग) जैसे बंधुआ मजदूरी या भीख मंगवाने के लिए तस्करी करने) के लिए सजा निर्दिष्ट करता है। उदाहरण के लिए एग्रेवेटेड ट्रैफिकिंग के लिए 10 साल के सश्रम कारावास की सजा दी जाएगी जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है। इसकेे साथ ही न्यूनतम एक लाख रुपए का जुर्माने लगाया जाएगा। इसके अतिरिक्त ऐसी किसी सामग्री को प्रकाशित करने पर, जिसका परिणाम मानव तस्करी हो सकता है, पाँच से 10 वर्ष के बीच के कारावास की सजा हो सकती है और 50,000 रुपए से एक लाख रुपए के बीच का जुर्माना भरना पड़ सकता है।

प्रभावः

  • नए कानून के पारित हो जाने के बाद, भारत दक्षिण एशियाई देशों को मानव तस्करी से निपटने हेतु एक प्रभावकारी कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
  • यह कानून भारत को सतत विकास लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करेगा।
  • यह कानून भारत के वैश्विक दासता सूचकाँक में गिरते स्तर को सुधारने में सहायता करेगा।
  • इस कानून के पारित होने से वैश्विक स्तर पर भारत की छवि अच्छी होगी।

निष्कर्ष

विधेयक में उपस्थित विवादित प्रावधानों को दूर करने के लिए सभी हितधारकों से उनकी राय पूछी जानी चाहिए, तथा अगर आवश्यकता हो तो संशोधन भी करना चाहिए। समग्रतः अगर देखें तो विधेयक व्यक्तियों विशेषकर महिलाओं, बालकों एवं पीड़ितों के दुर्व्यापार को रोकने के लिए लाया गया है, जो एक स्वागत योग्य कदम है।

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