यूपीएससी आईएएस मुख्य परीक्षा के लिए उत्तर लेखन अभ्यास कार्यक्रम: पेपर - IV (सामान्य अध्ययन - 3) - 30 जुलाई 2018


यूपीएससी आईएएस मुख्य परीक्षा के लिए उत्तर लेखन अभ्यास कार्यक्रम (Answer Writing Practice for UPSC IAS Mains Exam)


मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम:

  • पेपर - IV (सामान्य अध्ययन - 3): (प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, जैव-विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा- प्रबंधन)

प्रश्न - सीआरआईएसपीआर-कैस 9 (CRISPR-Cas9) जीन-एडिटिंग तकनीक की व्याख्या करें। भारतीय संदर्भ में, जीनोमिक्स क्रांति से जुड़े लाभो एवं चुनौतियों की चर्चा करें। (250 शब्द)

मॉडल उत्तर:

दृष्टिकोण

  • चर्चा में क्यों है?
  • जीन एडिटिंग तकनीक एवं सीआरआईएसपीआर-सीएएस-9
  • भारतीय सँदर्भ में जीनामिक्स क्राँति से जुड़े लाभ
  • भारतीय सँदर्भ में जीनोमिक्स क्राँति से जुड़ी चुनौतियाँ
  • निष्कर्ष

चर्चा में क्यों है?

  • हाल ही में सीआरआईएसपीआर-सीएएस-9 (CRISPR- cas-9) जीन एडिटिंग तकनीक से संबंधित तीन अध्ययन रिपोर्ट मेडिसिन पत्रिका नेचर में प्रकाशित हुए थे।
  • हाल ही में चीन, दक्षिण कोरिया एवं ओरेगन हेल्थ एवं साइंस यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने मिलकर CRISPR-cas-9 नामक जीन एडिटिंग तकनीक का प्रयोग करके मानव भ्रूण में व्याप्त खराबियों को दूर करने में सफलता अर्जित की है।
  • चीन एवं अमेरिका में कैंसर के इलाज के लिए इस तकनीक के प्रयोग पर परीक्षण चल रहा है।
  • कृषि क्षेत्र में जीन एडिटिंग तकनीक के प्रयोग से फसलों की एक नई प्रजाति जल्द ही व्यवसायिक प्रयोग के लिए उपलब्ध हो जाएगी।

जीन एडिटिंग तकनीक एवं सीआरआईएसपीआर-सीएएस-9

  • जीन एडिटिंग (संपादन) तकनीक जीवों के जीनोम सँरचना में डीएनए युग्म को जोड़ने या विस्थापित करने की एक प्रक्रिया है। इसके अन्तर्गत जब एंजाइम एक विशिष्ट अनुक्रम पर डीएनए को काटता है तब कोशिका द्वारा इसकी मरम्मत की जाती है।
  • क्रिस्पर (CRISPR) सीएएस-9, जीन एडिटिंग की एक नई तकनीक है, जो पूर्व के तकनीकों से अधिक तीव्र, सरल एवं ज्यादा सटीक है।
  • सीएएस-9 (Cas-9) एक एंजाइम है जो आणविक कैंची के रूप में कार्य करता है तथा डीएनए को अनुक्रम में काटने में मदद करता है।
  • क्रिस्पर सही स्थान की तलाश के लिए जीनोम को स्कैन करता है, उसके पश्चात् आणविक कैंची के रूप में सीएएस-9 प्रोटीन का प्रयोग डीएनए को काटने के लिए करता है।

जीनोमिक्स क्राँति से जुड़े लाभ

  • यह तकनीक देश में उपस्थित अनुवांशिक बीमारियों यथा सिकल सेल, थैलेसीमिया, एड्स, कैंसर आदि के उपचार में सहायक है।
  • कृषि क्षेत्र में इस तकनीक का प्रयोग कर ऐसे बीजों का निर्माण किया जा सकता है, जिसमें सूखा, बाढ़ एवं कीटों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता अधिक हो।
  • इस तकनीक के माध्यम से पशुओं में बीमारियों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता को विकसित कर देश के पशुधन से अधिक से अधिक लाभ अर्जित किया जा सकता है।
  • इस तकनीक का प्रयोग कर अधिक खाद्यान्न उत्पादन किया जा सकता है, जिससे भारत में अधिक से अधिक लोगों तक पोषण युक्त आहार पहुँचाना संभव हो पाएगा।

जीनोमिक्स क्राँति से जुड़ी चुनौतियाँ

  • भारत में जीनोमिक्स तकनीक का प्रयोग सीमित अस्पतालों में किया जा रहा है, जिसके कारण देश का एक बड़ा वर्ग इस तकनीक का लाभ नहीं उठा पा रहा है, इस तकनीक को बढ़ावा देने हेतु पूँजीगत अभाव एक मुख्य चुनौती है।
  • चूँकि भारत अनुवांशिक रूप विवधतापूर्ण है तथा कई भाषाई एवं धार्मिक समूहों में विभक्त है ऐसे में सारे नागरिकों की अनुवांशिक जानकारी एकत्र करना एवं संग्रहित करना दोनों ही चुनौतिपूर्ण है।
  • भारतीय सँदर्भ में सबसे बड़ी चुनौती जीन एडिटिंग तकनीक के प्रयोग एवं नैतिकता से जुड़े प्रश्नों को लेकर है। समाज का एक बड़ा वर्ग अभी भी उच्च शिक्षा के अभाव से ग्रसित है एवं इसे अपनी आस्था एवं संस्कृति पर ठेस के रूप में देखता है तो वहीं एक दूसरा वर्ग इसे वरदान के रूप में देखता है।
  • इस तकनीक के प्रयोग ने डिजाइनर बेबी की अवधारणा को जन्म दिया है, जिसे देश के नागरिकों द्वारा प्राकृतिक नियमों से छेड़छाड़ के रूप में देखा जा रहा है एवं देश के कानून के विपरीत भी माना जा रहा है।

निष्कर्ष

जीन एडिडिंग तकनीक ने वर्तमान पीढ़ी के जीवन को सरल बनाने के सारे रास्ते खोल दिए हैं तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक उम्मीद जगा दी है। आवश्यकता केवल इस बात की है कि एक समग्र दृष्टिकोण का विकास कर इस तकनीक का अधिक से अधिक लाभ उठाया जाए तथा चुनौतियों को दूर करने का प्रयास किया जाए।

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