यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: गाजा पर हमले को ‘युद्ध अपराध’ का दर्जा दिया जाना (Attack on Gaza to be Designated a 'War Crime')

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (Current Affairs Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): गाजा पर हमले को ‘युद्ध अपराध’ का दर्जा दिया जाना (Attack on Gaza to be Designated a 'War Crime')

गाजा पर हमले को ‘युद्ध अपराध’ का दर्जा दिया जाना (Attack on Gaza to be Designated a 'War Crime')

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार प्रमुख (UN human rights chief) मिशेल बैचलेट ने कहा है कि हमास चरमपंथी समूह शासित गाजा पट्टी पर इजरायल के घातक हवाई हमले ‘युद्ध अपराध’ (war crimes) की श्रेणी में आते हैं।

प्रमुख बिन्दु

  • मिशेल बैचलेट ने कहा कि संघर्ष के दौरान हमास की ओर से अंधाधुंध रॉकेट दागना भी युद्ध के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन था। इसका प्रस्ताव 24/9 मतों से पारित हो गया है। इसके तहत युद्ध अपराधों व अन्य दुर्व्यवहारों के लिए जांच आयोग गठित किया जाएगा।
  • हमास और इजरायल के बीच 11 दिनों तक चले संघर्ष में गाजा में 66 बच्चों और 39 महिलाओं समेत 248 लोगों की मौत हो गयी। वहीं, इजराइल में भी दो बच्चे समेत 12 लोगों ने जान गंवाई।
  • मिशेल बैचलेट ने इजराइल से जवाबदेही सुनिश्चित करने का अनुरोध करते हुए अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत पारदर्शी, निष्पक्ष जांच कराने को कहा है।
  • हालांकि इस प्रस्ताव में हमास या अन्य फलस्तीनी आतंकी समूहों का जिक्र नहीं होने के कारण आलोचकों ने इसमें संतुलन की कमी का हवाला भी दिया है। प्रस्ताव पर हुए मतदान में 14 देश वोटिंग प्रक्रिया से बाहर रहे, जिनमें भारत भी शामिल है।
  • यूएनएचआरसी द्वारा गठित जांच आयोग गाजा संघर्ष की जड़ तक जांच करेगा। पारित हुए प्रस्ताव के मुताबिक, अस्थिरता, हिंसक संघर्ष के बचाव, भेदभाव और दमन की भी जांच होगी। इसमें कुछ देशों से हथियारों की आपूर्ति को लेकर भी टिप्पणी की गई है और कहा गया है कि यह मानवाधिकारों और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का गंभीर हनन है।

युद्ध अपराध क्या है?

  • अंतरराष्ट्रीय कानून असैन्य नागरिकों या नागरिक इलाकों में अविवेकपूर्ण बल के इस्तेमाल पर रोक लगाता है।
  • युद्ध अपराध निम्न स्थिति में माना जाता है- सैनिकों द्वारा युद्ध के मान्य नियमों को ना मानना, ऐसे लोग जो शत्रु की सेना के सदस्य नहीं हैं लेकिन हमला कर रहे हैं तो वो भी युद्ध अपराध है। इसके अतिरिक्त जासूसी तथा युद्ध से जुड़ा विश्वासघात एवं लूटपाट को अंजाम देना युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है।

जिनेवा कन्वेंशन

  • जेनेवा समझौते में चार संधियां और तीन अतिरिक्त प्रोटोकॉल (मसौदे) शामिल हैं, जिसका मकसद युद्ध के वक्त मानवीय मूल्यों को बनाए रखने के लिए कानून तैयार करना है। मानवता को बरकरार रखने के लिए पहली संधि 1864 में हुई थी। इसके बाद दूसरी और तीसरी संधि 1906 और 1929 में हुई।
  • द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1949 में 194 देशों ने मिलकर चौथी संधि की थी। इंटरनेशनल कमेटी ऑफ रेड क्रास के मुताबिक जेनेवा समझौते में युद्ध के दौरान गिरफ्तार सैनिकों और घायल लोगों के साथ कैसा बर्ताव करना है, इसको लेकर दिशा निर्देश दिए गए हैं। इसमें साफ तौर पर ये बताया गया है कि युद्धबंदियों (POW) के क्या अधिकार हैं। साथ ही समझौते में युद्ध क्षेत्र में घायलों की उचित देखरेख और आम लोगों की सुरक्षा की बात कही गई है।
  • जेनेवा संधि के तहत युद्धबंदियों को डराया-धमकाया नहीं जा सकता। इसके अलावा उन्हें अपमानित नहीं किया जा सकता। इस संधि के मुताबिक युद्धबंदियों (POW) पर मुकदमा चलाया जा सकता है। इसके अलावा युद्ध के बाद युद्धबंदियों को वापस लैटाना होता है। कोई भी देश युद्धबंदियों को लेकर जनता में उत्सुकता पैदा नहीं कर सकता।

जिनेवा कन्वेंशन के प्रावधानों के पालन की निगरानी

  • इंटरनेशनल कमेटी ऑफ रेड क्रास की अंतर्राष्ट्रीय समिति आमतौर पर निगरानी की भूमिका को निभाती है।