यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: उत्तर-पूर्व के लिए अंतर्देशीय-जल परिवहन प्रणाली (Inland-Water Transport System for the North-East)

खबरों में क्यों?

  • भारतीय खाद्य निगम (FCI) के लिए 200 मीट्रिक टन (MT) खाद्यान्न ले जाने वाला एक जहाज ने 6 मार्च को ब्रह्मपुत्र के दक्षिणी तट पर गुवाहाटी के पांडु बंदरगाह पर डॉक किया था।

परियोजना

  • बांग्लादेश के रास्ते भारत में गंगा-बेल्ट से उत्तर-पूर्व (एनई) तक कार्गो की शिपिंग एफसीआई की पायलट परियोजना थी।
  • 2018 में एक पायलट प्रयोग किया गया था जब 1,233 टन फ्लाई ऐश ले जाने वाले 1,000 टन के दो बार्ज ने बिहार के कहलगांव से पांडु तक एक महीने से अधिक समय तक 2,085 किमी की यात्रा की।
  • FCI कार्गो से NW1 (हल्दिया से प्रयागराज) और NW2 (धुबरी से सदिया) के बीच नियमित सेवाए शुरू होने की उम्मीद है, जो पूर्वोत्तर के लिए "अंतर्देशीय जल परिवहन के एक नए युग की शुरुआत" होगी ।

जलमार्ग के लाभः

  • तुलनात्मक लाभः अंतर्देशीय जलमार्ग परिवहन के अन्य साधनों की तुलना में अत्यधिक सस्ता और पर्यावरण अनुकूल है, विशेष रूप से लंबी दूरी में।
  • भीड़ में कमी: अंतर्देशीय जलमार्ग परिवहन भारत में भीड़भाड़ वाले रेल और सड़क नेटवर्क की भीड़भाड़ को कम करने में भी मदद करेगा।
  • क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावाः भारत और नेपाल ने व्यापार संधि में अंतर्देशीय जलमार्ग को शामिल करने के लिए सहमति व्यक्त की है। भूटान के पत्थर निर्यातकों ने परिवहन के वैकल्पिक साधन के रूप में अंतर्देशीय जलमार्गों को चिन्हित किया है।
  • कुशल और प्रभावी ऊर्जा खपतः एक अश्वशक्ति पानी में 4000 किग्रा भार ले जा सकती है जबकि यह सड़क और रेल द्वारा क्रमशः 150 किग्रा और 500 किग्रा भार ढो सकती है।
  • कम रखरखाव लागतः नहरों के निर्माण और रखरखाव की लागत बहुत कम है, इसके अलावा, अंतर्देशीय जल परिवहन के संचालन की लागत बहुत कम है।

भारत में अंतर्देशीय जलमार्ग की सीमाएं

  • बाढ़ और सूखा: मानसून में नदियों में बाढ़ आ जाती है, जबकि शेष वर्ष में पानी की कमी रहती है।
  • भारतीय दुविधाः सिंचाई के लिए पानी या परिवहन के लिए पानी।
  • उत्तर पूर्व भारत की नदियाँ चट्टानी क्षेत्रों से होकर बहती हैं। इसलिए कई क्षेत्रों में झरने के कारण नाव चलाने के लिए उपयुक्त नहीं हैं।
  • लास्ट माइल कनेक्टिविटी: नावों की तुलना में रेलवे के पास एंड टू एंड कनेक्टिविटी बेहतर है।

NW1 और NW2 का महत्व

महत्वपूर्ण टर्मिनलों को जोड़नाः

  1. यह भारत में भागलपुर, मनिहारी, साहिबगंज, फरक्का, त्रिवेणी, कोलकाता, हल्दिया, हेमनगर, बांग्लादेश में खुलना, नारायणगंज, सिराजगंज और चिलमारी और फिर भारत में धुबरी और जोगीघोपा से होते हुए 2,350 किलोमीटर की दूरी तय करता है।

कनेक्टिविटी और विकासः

  1. स्वतंत्रता के समय, असम की प्रति व्यत्तिफ़ आय देश में सबसे अधिक थी। इसका मुख्य कारण ब्रह्मपुत्र और बराक नदी (दक्षिणी असम) प्रणालियों के माध्यम से बंगाल की खाड़ी में स्थित बंदरगाहों तक पहुंच था।
  2. 1947 के बाद फेरी सेवाएं छिटपुट रूप से जारी रहीं लेकिन 1965 में पाकिस्तान के साथ युद्ध के बाद बंद हो गईं, क्योंकि तब बांग्लादेश पूर्वी पाकिस्तान हुआ करता था।
  3. उत्तर पूर्व की स्थिति खराब हो गई क्योंकि नदी मार्ग काट दिए गए और "चिकन नेक" के माध्यम से रेल और सड़क परिवहन महंगे विकल्प थे।
  4. भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल (आईबीपी) मार्ग के माध्यम से कार्गो आवाजाही की शुरुआत व्यापार के लिए एक व्यवहार्य, आर्थिक और पारिस्थितिक विकल्प प्रदान करने जा रही है।
  5. पूर्वोत्तर के विकास के लिए निर्बाध कार्गो परिवहन एक आवश्यकता रही है।

पूर्वोत्तर के विकास के लिए सरकारी सहायताः

  1. पीएम गति शक्ति पहल ने पूर्वोत्तर को धीरे-धीरे एक कनेक्टिविटी हब में बदलने और ब्रह्मपुत्र, जो बांग्लादेश में गंगा से मिलती है, पर कार्गो की आवाजाही को तेज करने की परिकल्पना की।
  2. इन नदियों को बांग्लादेश में जमुना और पद्मा कहा जाता है। इनके माध्यम से बहु टर्मिनल विकास अन्य क्षेत्रों में सकारात्मक स्पिलओवर प्रभाव प्रदान करेगा।

निष्कर्ष

  1. एफसीआई के लिए 200 मीट्रिक टन खाद्यान्न ले जाने वाले मालवाहक पोत के डॉकिंग ने पूर्वोत्तर में अंतर्देशीय जल परिवहन प्रणाली के लिए आशा को फिर से जगा दिया है।
  2. पोत 2,350 किमी की दूरी तय करते हुए भारत और बांग्लादेश के महत्वपूर्ण शहरों से होकर गुजरा है।