यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: परमाणु संलयन सफलता (Nuclear fusion breakthrough)

खबरों में क्यों?

  • यूनाइटेड किंगडम में वैज्ञानिकों ने परमाणु संलयन प्रतिक्रिया से अब तक की सबसे बड़ी मात्रा में ऊर्जा का उत्पादन करने में सफलता प्राप्त की है. इस परिणाम को फ्यूज़न न्यूक्लियर रिएक्टर बनाने के लिए चल रहे वैश्विक प्रयासों में एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है

परमाणु संलयन

  • नाभिकीय संलयन अभिक्रिया में दो हल्के नाभिक आपस में मिलकर एक अपेक्षाकृत भारी नाभिक बनाते हैं.
  • इस प्रक्रिया में भारी मात्रा में ऊर्जा भी निकलती है.
  • तापमान जिस पर प्रोटॉन में कूलम्ब के अवरोध को पार करने के लिए पर्याप्त ऊर्जा होगी, वह बहुत अधिक है

थर्मोन्यूक्लियर फ्यूज़न

  • सामग्री का तापमान तब तक बढ़ाना जब तक की कूलम्ब बाधा को दूर करने के लिए कणों में केवल उनकी तापीय गतियों के कारण पर्याप्त ऊर्जा न हो.
  • थर्मोन्यूक्लियर फ्यूज़न के लिए तापमान और दबाव की चरम स्थितियों की आवश्यकता होती है.
  • तारों में ऊर्जा का उत्पादन थर्मोन्यूक्लियर फ्यूज़न का उदाहरण है

सूर्य में ऊर्जा उत्पादन

  • एक हाइड्रोजन परमाणु का द्रव्यमान 1-007825 परमाणु द्रव्यमान इकाई (एएमयू) है.
  • जब चार हाइड्रोजन परमाणु संयुक्त होते हैं, तो यह हीलियम परमाणु में परिवर्तित हो जाता है.
  • चार हाइड्रोजन परमाणुओं के द्रव्यमान का योग 4.03130 AMU है, जबकि एक हीलियम परमाणु का द्रव्यमान 4.00268 AMU है.
  • जैसा कि हम जानते हैं, पदार्थ न तो निर्मित होता है और न ही नष्ट होता है_ इसलिए द्रव्यमान अंतर 0.02862 AMU आइंस्टीन के प्रसिद्ध सूत्र E=mc2 के माध्यम से शुद्ध ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है.
  • अंतिम प्रतिक्रिया है:- 411H $2e- --> 42He $6 $2 $26-7MeV
  • इस जेईटी के प्रयोगात्मक परिणाम दर्शाते हैं कि आईटीईआर को डिजाइन करने के लिए इस्तेमाल किए गए मॉडल मजबूत हैं, जो उन पर हमारा विश्वास बढ़ाते हैं. ये प्रयोग आईटीईआर के डिजाइनों को मान्य करने में मदद करेंगे.

हाल की प्रगति

  • चीन के एक्सपेरिमेंटल एडवांस्ड सुपरकंडक्टिंग टोकामक (ईएएसटी) ने जनवरी 2022 में 1,056 सेकंड के लिए प्लाज्मा को 70 मिलियन डिग्री सेल्सियस पर बनाए रखा.
  • फरवरी 2022 में, ऑक्सफोर्डशायर, यूके में जॉइंट यूरोपीय टोरस (जेईटी) संलयन प्रयोग ने थर्मोन्यूक्लियर फ्यूज़न से 59 मेगाजूल (MJ) ऊर्जा का उत्पादन किया.

टोकामक के बारे में

  • संलयन होने के लिए, पहला कदम गर्म प्लाज्मा का निर्माण होना चाहिए.
  • हाइड्रोजन की एक छोटी सी गोली को लाखों डिग्री तक गर्म करना और प्लाज्मा उत्पन्न करना इतना कठिन नहीं है_ लेजर यह अच्छी तरह से कर सकता है.
  • लाखों डिग्री तापमान पर मौजूद गर्म प्लाज्मा को कंटेनर की दीवार को छूने से रोकना मुख्य कार्य है.
  • सोवियत भौतिक विज्ञानी इगोर टैम और आंद्रेई सखारोव ने संकल्पना की कि यदि कोई टोरस के आकार में एक चुंबकीय क्षेत्र बना सकता है, तो गर्म प्लाज्मा को अदृश्य चुंबकीय बोतल में समाहित किया जा सकता है.
  • इस सिद्धांत के आधार पर, मास्को के कुर्चतोव संस्थान में लेव आर्टसिमोविच के नेतृत्व में एक सोवियत टीम द्वारा एक प्रयोगात्मक रिएक्टर का निर्माण और प्रदर्शन किया गया.
  • टोकामक रूसी शब्द "टोरोग्दलनाका कामेरस मैग्निटनीमी काटुष्कामी" के लिए एक संक्षिप्त शब्द है, जिसका अर्थ है "चुंबकीय कॉइल के साथ टॉरॉयडल कक्ष".
  • वैकल्पिक डिजाइन तैयार और परीक्षण किए जाने के बावजूद, टोकामक फ्यूज़न हासिल करने के मामले में बहुत आगे है.
  • भारत, रूस, अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, यूरोपीय संघ सहित 35 देश, अंतर्राष्ट्रीय थर्मोन्यूक्लियर प्रायोगिक रिएक्टर (आईटीईआर) के हिस्से के रूप में संयुक्त रूप से सबसे बड़ा टोकामक बनाने के लिए सहयोग कर रहे हैं.
  • 2035 में, संयंत्र द्वारा 500 मेगावाट बिजली उत्पन्न करने और इसके संचालन के लिए 50 मेगावाट की खपत की उम्मीद है, जिसके परिणामस्वरूप शुद्ध 450 मेगावाट बिजली उत्पादन होगा.
  • दुनिया भर में किसी भी टोकामक्स ने इनपुट से अधिक शुद्ध ऊर्जा उत्पादन का प्रदर्शन नहीं किया है

हाल की उपलब्धि का महत्व

  • यदि व्यावसायिक ऊर्जा प्राप्त करनी है तो उच्च तापमान पर प्लाज्मा को लंबे समय तक बनाए रखने की आवश्यकता होती है.
  • जेईटी प्रयोग इनपुट ऊर्जा का एक तिहाई उत्पादन के रूप में प्राप्त कर सका है, जो पहले के परिणामों से एक महत्वपूर्ण कदम है

भारत में परमाणु संलयन

  • बहुत पहले 1955 में, जिनेवा में पहली श्शांति के लिए परमाणुश् बैठक में, होमी जे. भाभा ने थर्मोन्यूक्लियर फ्यूज़न से आने वाली ऊर्जा में एक भविष्य देखा.
  • गांधीनगर में इंस्टिट्यूट फॉर प्लाज्मा रिसर्च (आईपीआर) और साहा इंस्टिट्यूट ऑफ न्यूक्लियर फिजिक्स (एसआईएनपी), कोलकाता में हॉट प्लाज्मा प्रोजेक्ट ने भारत में परमाणु संलयन अनुसंधान में अग्रणी भूमिका निभाई