एआईएम प्राइम प्रोग्राम - समसामयिकी लेख

की-वर्डस :- नीति आयोग, अटल इनोवेशन मिशन, उद्यमिता, मेक-इन-इंडिया, मेंटरिंग, हायरिंग, फंडिंग, समृद्धि योजना, स्टार्ट-अप इंडिया सीड फंड, स्टार्ट-अप इंडिया इनिशिएटिव।

संदर्भ :-

  • 10 मई को डा. आम्बेडकर इंटरनेशनल सेंटर में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री ने अटल इनोवेशन मिशन- प्रोग्राम फॉर रिसर्चर्स फॉर इनोवेशन, मार्केट रेडीनेस एंड एंटरप्रेन्योरशिप (एआईएम पीआरआईएमई) प्लेबुक और स्टार्ट-अप शोकेस लॉन्च करते हुए कहा कि केंद्र सरकार भारत को एक प्रमुख वैश्विक नवाचार अर्थव्यवस्था बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
  • केंद्र सरकार ने 'आउट-ऑफ-द-बॉक्स सोच' को मान्यता दी है और मेक-इन-इंडिया कार्यक्रम शुरू किया है जिसने स्वास्थ्य और चिकित्सा प्रौद्योगिकी क्षेत्रों को बढ़ावा दिया है। आने वाले दशक में, भारत स्वास्थ्य देखभाल उत्पादों का एक प्रमुख निर्यातक बनने की ओर अग्रसर है, जिसमें चिकित्सीय उपकरण, निदान, प्रोटीन आधारित जीवविज्ञान, पारंपरिक चिकित्सा आदि शामिल हैं।
  • महामारी के दौरान जब स्वास्थ्य सेवा में केंद्र ने कदम रखा, स्टार्ट-अप ने इस आपदा को अवसर में बदला और डायग्नोस्टिक्स, पीपीई, वेंटिलेटर और लास्ट माइल वैक्सीन डिलीवरी में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसने भारतीय स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में समस्याओं को समाधान करने में भारतीय स्टार्ट-अप की क्षमता को प्रदर्शित किया है।

एआईएम-प्राइम :-

नीति आयोग द्वारा अटल इनोवेशन मिशन (एआईएम) ने एआईएम–प्राइम (प्रोग्राम फॉर रिसर्चर्स ऑन इनोवेशन, मार्केट-रेडीनेस एंड एंटरप्रेन्योरशिप) लॉन्च किया है। इसका उद्देश्य पूरे भारत में विज्ञान आधारित स्टार्ट-अप और उद्यमों को बढ़ावा देना और उनका समर्थन करना है।

एआईएम ने इस कार्यक्रम को शुरू करने के लिए बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन (बीएमजीएफ) के साथ साझेदारी की है। इसे वेंचर सेंटर द्वारा कार्यान्वित किया जाएगा जो एक गैर-लाभकारी प्रौद्योगिकी व्यवसाय इनक्यूबेटर है।

एआईएम प्राइम कार्यक्रम सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मजबूत स्वदेशी विनिर्माण क्षमताओं के निर्माण के उद्देश्य की पूर्ति करेगा।

एआईएम प्राइम कार्यक्रम 9 महीने की अवधि में प्रशिक्षण और मार्गदर्शन के माध्यम से विज्ञान आधारित गहन-प्रौद्योगिकी विचारों को बाजार में बढ़ावा देगा।

भारत में नवाचारों और स्टार्ट-अप के सामने आने वाली चुनौतियां :-

  • संस्कृति :- उद्यमिता और स्टार्टअप की घटना देश में एक अभिनव पहल है। पिछले डेढ़ दशक में ही देश में लोग नौकरी तलाशने वाले से नौकरी देने वाले बन गए हैं। स्टार्टअप करना कठिन है और इसमें अधिकांश लोगों को सफलताओं से ज्यादा असफलताएं दिखती हैं। अक्सर एक उद्यमी को असफलताओं और अभूतपूर्व कठिनाई का सामना करने के लिए तैयार रहने की आवश्यकता होती है। हालांकि, सांस्कृतिक रूप से हमें असफल होने के लिए तैयार नहीं किया जाता है और न ही सामाजिक रूप से असफलता को स्वीकार किया जाता है।
  • मेंटरिंग :- एक स्टार्टअप के लिए ऐसे मेंटर्स का होना बहुत जरूरी है जो व्यवसाय शुरू करने की समान प्रक्रिया से गुजरे हो या जिनके पास बिजनेस का अनुभव हो। एक अच्छा मेंटर अक्सर वह होता है जो मूल्यवान इनपुट प्रदान करके असफलता को सफलता में बदलता है। हालांकि, देश में स्टार्टअप्स को सलाह देने के लिए कोई औपचारिक तंत्र नहीं है।
  • नीतियां :- सरकार उद्यमशील पारिस्थितिकी तंत्र का सबसे बड़ी प्रवर्तक है। व्यवसाय करने में आसानी और कंपनियों की मदद करने में सरकार की भूमिका सफलता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है। भारत में व्यवसाय शुरू करना बेहद मुश्किल है और असंख्य कानूनों और विनियमों के कारण ओईसीडी देशों में केवल 9 दिनों की तुलना में भारत में इन नियमों के अनुपालन में लगभग 30 दिन का समय लगता हैं। स्टार्टअप के फलने-फूलने और सफल होने के लिए, सरकार के पास आर्थिक विकास में उद्यमिता के महत्व को समझने और इसमें सुधार करने के लिए असीम संभावनाएं हैं।
  • हायरिंग :- एक अनिश्चित अर्थव्यवस्था में, जहां कोई मांग के बारे में सही आंकलन करने की स्थित में नहीं है, एक स्टार्टअप के लिए, आवश्यक कर्मचारियों की संख्या का सही अनुमान लगाना कठिन और जोखिमपूर्ण कार्य है। हालांकि, यह एक छोटी सी समस्या है जहां सबसे बड़ा मुद्दा कुशल जनशक्ति का आभाव होना है।
  • वित्त पोषण :- स्टार्टअप्स के लिए पूंजी और पूंजी तक पहुंच एक सदाबहार समस्या रही है। यद्यपि एंजेल निवेशकों, उद्यम पूंजी और निजी इक्विटी ने कुछ हद तक सहायता की है, बड़ी संख्या में स्टार्टअप अभी भी संस्थागत सेटअप से धन जुटाने के लिए जूझ रहे हैं।

नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सरकार की पहल :-

समृद्धि योजना :- इलेक्ट्रॉनिक्स सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्री ने समृद्धि योजना का शुभारंभ किया, जो इलेक्ट्रानिक सूचना और प्रौद्योगिकी से संबंधित स्टार्ट अप को बढ़ावा देने के लिए लांच की गई। इस योजना को स्टार्ट-अप को फंडिंग में सहायता प्रदान करने के साथ ही कौशल सेट को एक साथ लाने में सहायता करने के लिए डिज़ाइन किया गया है जो स्टार्ट अप को सफल बनाने में सहायक सिद्ध होगी।
स्टार्ट-अप इंडिया सीड फंड :- 16 जनवरी 2021 को, प्रधान मंत्री ने स्टार्ट-अप की सहायता करने और इच्छुक उद्यमियों के विचारों का समर्थन करने के लिए 1,000 करोड़ रुपये के 'स्टार्ट-अप इंडिया सीड फंड' की घोषणा की।

स्टार्ट-अप इंडिया पहल :- भारत के प्रधानमंत्री ने वर्ष 2016 में स्टार्ट-अप इंडिया पहल की शुरुआत की। विचार उद्यमशीलता की भावना को प्रोत्साहन देकर पूंजी और रोजगार क्षमता को बढ़ाना है ।
एस्पायर :- सरकार ने भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन के सामाजिक और आर्थिक पहलुओं को सुधारने के लिए निरंतर प्रयास किए हैं और इस संबंध में भारत सरकार द्वारा स्वीकृत सबसे लोकप्रिय योजनाओं में से एक है एस्पायर। नवाचार, ग्रामीण उद्योग और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए एक योजना (एस्पार) सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई ) द्वारा प्रवर्तित भारत सरकार की एक पहल है।

स्रोत :- Livemint

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3:
  • भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधन एकत्रीकरण, विकास और रोजगार से संबंधित मुद्दे।

मुख्य परीक्षा प्रश्न:

  • भारत में इनोवेशन और स्टार्टअप्स के सामने आने वाली चुनौतियों पर चर्चा कीजिये तथा इन चुनौतियों से निपटने के उपाय सुझाएं।