फिनलैंड और स्वीडन का नाटो में शामिल होना - समसामयिकी लेख

की-वर्ड्स :- अंतरसरकारी सैन्य गठबंधन; रणनीतिक झटका; भू-राजनीतिक रीसेट; ट्रूमैन सिद्धांत।

संदर्भ :-

फिनलैंड और स्वीडन ने नाटो का हिस्सा बनने की इच्छा व्यक्त की है। ये घोषणाएं रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए सबसे बड़ा रणनीतिक झटका है, जिनकी विदेश नीति का सबसे महत्वपूर्ण फोकस नाटो को कमजोर करने पर रहा है।

लेख की मुख्य बातें :-

नाटो क्या है?

  • उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन, जिसे उत्तरी अटलांटिक गठबंधन के रूप में भी जाना जाता है, 30 सदस्य राज्यों- 28 यूरोपीय राज्यों, संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा के बीच एक अंतर-सरकारी सैन्य गठबंधन है।
  • यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका में ट्रूमैन प्रशासन के आग्रह पर स्थापित किया गया था।
  • ट्रूमैन सिद्धांत एक अमेरिकी विदेश नीति है जो शीत युद्ध के दौरान सोवियत भू-राजनीतिक विस्तार को रोकने के प्राथमिक लक्ष्य से उत्पन्न हुई है।
  • संगठन उत्तर अटलांटिक संधि को लागू करता है, जिस पर 4 अप्रैल 1949 को हस्ताक्षर किए गए थे।
  • गठबंधन के 12 संस्थापक सदस्य : बेल्जियम, कनाडा, डेनमार्क, फ्रांस, आइसलैंड, इटली, लक्जमबर्ग, नीदरलैंड, नॉर्वे, पुर्तगाल, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका ने 1949 में नाटो की स्थापना की।
  • लेकिन पिछले कुछ वर्षों में, नाटो का विस्तार 30 सदस्य देशों तक हो गया है। सबसे हाल का सदस्य उत्तर मैसेडोनिया है।

नाटो में शामिल होने के क्या लाभ हैं?

सैन्य लाभ :-

  • सामूहिक सुरक्षा :-
  • इस संधि के अनुच्छेद 5 में कहा गया है कि यदि एक सहयोगी पर हमला होता है, तो इसे सभी पर हमला माना जाएगा।
  • यह रणनीतिक रूप से विकसित देशों की दीर्घकालिक सामूहिक रक्षा प्रदान करता है।
  • जब 9/11 के आतंकवादी हमले हुए, तो अन्य सभी सदस्यों ने अफगानिस्तान में आतंकवाद-विरोधी जवाबी कार्रवाई में योगदान दिया।
  • साइबर रक्षा क्षमताएं :-
  • यह सहयोगियों को सूचना साझा करने, शिक्षा निवेश और चल रहे प्रशिक्षण के माध्यम से अपने बचाव को बढ़ाने में मदद करता है।
  • साइबर रक्षा विशेषज्ञ उन संगठनों के साथ काम करते हैं जो किसी भी देश को हमले से बचाने के लिए नेटवर्क में एक साथ आ जाते हैं।
  • आतंकवाद विरोधी क्षमताओं का विकास करना :-
  • आतंकवाद की जांच के लिए नेपल्स, इटली में सहयोगियों के लिए एक केंद्र स्थापित किया गया है।
  • लागत प्रभावी रक्षा :-
  • प्रत्येक देश को अपने सकल घरेलू उत्पाद का 2% रक्षा पर खर्च करना चाहिए (वेल्स शिखर सम्मेलन, 2014)।
  • प्रत्येक सदस्य के हितों की रक्षा की जाती है और एक प्रभावी सेना को बनाए रखने की लागत देशों के बीच वितरित की जाती है।
  • आर्थिक लाभ :-
  • सदस्यों के बीच मुक्त व्यापार समझौतों के माध्यम से सदस्य राष्ट्र के सामान को दुनिया के बाकी हिस्सों पर प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलता है।
  • राजनीतिक लाभ :-
  • यह राष्ट्रों की आंतरिक राजनीति में हस्तक्षेप नहीं करता है। यह अपने घटक सदस्यों की संप्रभुता को कम नहीं करता है। चूंकि निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाते हैं, प्रत्येक राष्ट्र की के विचारों का सम्मान किया जाता है।

नाटो में हाल की कार्यवाही :-

भू-राजनीतिक परिवर्तन :-

  • फिनलैंड का रुख :-
  • फ़िनलैंड द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद से तटस्थ रहा है। यह रूस के साथ 1300 किमी की सीमा साझा करता है। 1939 में, स्टालिन की सेना के आक्रमण के बाद, फ़िनलैंड ने अपने क्षेत्र का 10% खो दिया। जर्मन नाजियों के साथ गठबंधन में फिन्स ने 1940 में सोवियत सैनिकों पर हमला किया था। नाज़ी-जर्मनी की हार के बाद शांति स्थापित हुई और फ़िनलैंड ने तब से गुटनिरपेक्षता बनाए रखी है। लेकिन पिछले हफ्ते फ़िनलैंड की प्रधानमंत्री ने आशा व्यक्त की कि वे बिना देर किए नाटो सदस्यता के लिए आवेदन करेंगे।
  • स्वीडन का रुख :-
  • यह 200 वर्षों से किसी भी सैन्य गठबंधनों से बाहर रहा है। लेकिन, हाल ही में उसने कहा कि नाटो की सदस्यता से उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी और बाल्टिक और नॉर्डिक क्षेत्रों में स्थिरता आएगी।
  • रूस ने 24 फरवरी को यूक्रेन पर इसलिए आक्रमण किया ताकि अपने पड़ोस में नाटो के विस्तार को रोका जा सके लेकिन इस आक्रमण ने दोनों पड़ोसी देशों को नाटो में शामिल होने का अवसर दे दिया।

नाटो सदस्यों और रूस की प्रतिक्रिया :-

  • तुर्की ने स्वीडन और फिनलैंड की नाटो में शामिल होने का विरोध किया है।
  • यू.एस. और यू.के. नाटो के विस्तार के पक्ष में हैं।
  • जर्मनी और फ्रांस अधिक सतर्क रुख अपना रहे हैं।
  • हंगरी, जिसके रूस के साथ गहरे संबंध हैं और रूसी तेल आयात पर प्रतिबंध लगाने की यूरोपीय संघ की योजना पर सहमत हैं, ने नाटो के विस्तार पर अपने विचार स्पष्ट नहीं किए हैं।
  • रूस, नाटो के किसी और विस्तार के जवाब में सैन्य जवाबी कार्रवाई की धमकी देता रहा है।

आगे की राह :-

  • नाटो के सदस्यों को इस बात पर विचार करना चाहिए कि क्या नाटो के विस्तार से यूरोप में और शांति और स्थिरता आएगी।
  • यह विस्तार, परमाणु हथियारों से लैस रूस और नाटो के बीच मौजूदा संकट को खतरनाक स्तर तक बढ़ा देगा।
  • नाटो विस्तार के कई दौर और रूस की क्षेत्रीय आक्रामकता ने 1962 के क्यूबा मिसाइल संकट के बाद से दुनिया को सबसे खतरनाक क्षण में ला दिया है।
  • रूस को युद्ध रोकना चाहिए और सभी हितधारकों को इस मानव निर्मित संकट को समाप्त करने के लिए बातचीत और कूटनीति को फिर से शुरू करना चाहिए।

निष्कर्ष :-

रूस का ध्यान युद्ध समाप्त करने पर होना चाहिए न कि नाटो के विस्तार पर। तभी हम मानवता की बेहतरी के लिए कोविड के बाद की वैश्विक व्यवस्था का पुनर्निर्माण शुरू कर सकते हैं और महामारी से हुए नुकसान की कुछ भरपाई कर सकते हैं।

स्रोत :- द हिंदू

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2:
  • महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, एजेंसियां और मंच- उनकी संरचना, जनादेश; भारत और/या भारत के हितों को प्रभावित करने वाले वैश्विक समूह।

मुख्य परीक्षा प्रश्न:

  • नाटो संगठन क्या है? स्वीडन और फ़िनलैंड में नाटो का विस्तार यूरोप को अस्थिर करने के लिए ख़तरा बन सकता है? विश्लेषण करें।