कुपोषण की चुनौती से जूझता भारत - समसामयिकी लेख

चर्चा में क्यों?

हाल ही में प्रकाशित वैश्विक भुखमरी सूचकांक (ग्लोबल हंगर इंडेक्स) में भारत की रैंकिंग 116 देशों में 101वीं रही I

पृष्ठभूमि

अमेरिकी राष्ट्रपति जान.एफ़.कनेडी ने कहा था -‘भूख के खिलाफ जंग ही मानवता की आजादी की असली जंग हैI’ यानि भुखमरी मानव के प्राकृतिक और मौलिक अधिकारों का हनन करती है I विश्व में पर्याप्त खाद्य सामग्री होने के बावजूद विश्व का औसतन नौ में से एक व्यक्ति भूखा हैI इन भूखे लोगों में से दो तिहाई एशिया में रहते हैंI यद्यपि विकासशील और अल्पविकसित देशों में अल्पपोषित लोगों की संख्या में कमी आई है I यह 1990-92 में 23.3% से घटकर 2014 -16 में 12.9% रह गई है I किन्तु आज भी लगभग 80 करोड़ लोग अल्पपोषित हैंI

वैश्विक भुखमरी सूचकांक-2021

आयरलैंड की ‘कंसर्न वर्ल्डवाइड’ और जर्मनी की ‘वेल्थहुंगरहिल्स’ नामक संगठन द्वारा ‘वैश्विक भुखमरी सूचकांक- 2021’ संयुक्त रूप से जारी किया गया है I 2006 से प्रतिवर्ष अक्टूबर माह में (16वां वार्षिक संस्करण) यह सूचकांक जारी किया जाता हैI इस सूचकांक को जारी करने का उद्देश्य वैश्विक, क्षेत्रीय और देश के स्तर पर भूख को व्यापक रूप से मापना और ट्रैक करना हैI

  1. ‘वैश्विक भुखमरी सूचकांक रैंकिंग चार मापदंडों पर आधारित है- अल्पपोषण, चाइल्ड वेस्टिंग, चाइल्ड स्टंटिग और बाल मृत्यु दर I
  2. सूचकांक 100-बिंदु पैमाने पर भूख का निर्धारण करता है जहाँ 0 (शून्य भूख) सबसे अच्छा और 100 को सबसे खराब माना जाता है।

अल्पपोषण – अपर्याप्त कैलोरी गृहण क्षमता के कारण कुपोषण की समस्या होती है I

चाइल्ड वेस्टिंग- पांच साल से कम उम्र के बच्चे जिनका वज़न उनकी उंचाई के अनुपात से कम है, यह तीव्र कुपोषण को दर्शाता है।

  • चाइल्ड स्टंटिग –पांच साल से कम उम्र का बच्चा जिसकी उम्र की तुलना में कम लम्बाई है
  • बाल मृत्युदर – पाँच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर।

रैंकिंग में भारत से संबंधित मुद्दे

इस सूचकांक के लिए अल्पपोषण डाटा विश्व खाद्य संगठन (एफ़.ए.ओ) द्वारा प्रदान किया जाता है I एफ़.ए.ओ ने कोविड 19 के चलते भौतिक रूप से उपस्थित होकर सर्वे आयोजित नहीं किया, बल्कि टेलीफोन द्वारा एकत्रित की गई जानकारियों के आधार पर डाटा एकत्रित किया I

भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने एफ़.ए.ओ की सर्वे पद्धति को अवैज्ञानिक बताते हुए इस सूचकांक पर प्रश्नचिंह लगाये हैंI

भारत की स्थिति-2021 में भारत की रैंकिंग 116 देशों में 101वीं रही जबकि 2020 में भारत 93, 2019 में 102 और 2018 में 103 थीI

भारत के अन्य पड़ोसी देशों में पाकिस्तान- 92, नेपाल और बांग्लादेश- 76 तथा श्रीलंका 65वें स्थान पर है I यानि भारत अपने पड़ोसियों से पिछड़ी स्थिति में हैI

भारत ब्रिक्स देशों में भी सबसे पीछे हैI

भारत में 6 से 23 महीने के मात्र 9.6% बच्चों को न्यूनतम पौष्टिक आहार मिलता हैI

वैश्विक भुखमरी सूचकांक में भारत की खराब रैंकिंग के कारण

यूनिसेफ द्वारा प्रकाशित “वर्ल्ड चिल्ड्रेन रिपोर्ट” के अनुसार – हर दूसरा भारतीय बच्चा कुपोषण से ग्रस्त है I भारत में कुपोषण के कारण 5 वर्ष से कम उम्र के लगभग 8.82 लाख बच्चों की मृत्यु हो जाती हैI जो विश्व में सर्वाधिक है I यूनिसेफ की इस रिपोर्ट में लगभग 35% बच्चे बौने, 17% बच्चों का वजन उनकी लम्बाई की तुलना में कम थाI

विश्व खाद्य संगठन के अनुसार भारत में 194.4 मिलियन लोग अल्पपोषित हैI

भारत में कुपोषण के कारण

वर्ष 2000 के बाद अपेक्षाकृत तेजी से आर्थिक विकास हासिल करने के बावजूद भारत भूख को कम करने में सफ़ल नहीं हो सका हैI पारंपरिक अनाज, फल और अन्य सब्जी के उत्पादन में कमी के कारण इनकी खपत में कमी आई है I

खाद्य उपभोग की विविधता में कमी और पारंपरिक अनाज (ज्वार-बाजरा-रागी) का थाली से दूर होना, कुपोषण के पीछे की मुख्य वजह है I बढती आर्थिक असमानता और जलवायु परिवर्तन और कोविड 19 महामारी से उत्पन्न चुनौतियां भी कुपोषण को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है I

वांशिगटन विश्व विद्यालय द्वारा जारी बर्डन ऑफ़ डिसीज स्टडी 2019 के मुताबिक़ भारत में मृत्यु और विकलांगता के कारणों में कुपोषण सर्वप्रमुख है I

भारत सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयास

A) पोषण अभियान – मार्च 2018 में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा राजस्थान के झुंझुनू से पोषण अभियान कार्यक्रम की शुरुआत की गयी I

  • उद्देश्य- 1. गर्भवती महिलाओं और बच्चों की पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करते हुए बच्चों के कम पोषण और जन्म के समय कम वजन को सालाना 2 प्रतिशत और एनीमिया को 3 प्रतिशत तक कम करना I

B) प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना – इस योजना के अंतर्गत सरकार द्वारा गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को पहले जीवित बच्चे के जन्म हेतु 6000 रूपये की आर्थिक सहायता प्रदान करेगी ताकि महिलाओं और शिशुओं को पौष्टिक आहार प्राप्त हो सकेI

C) फूड फोर्टिफिकेशन- प्रमुख विटामिनों तथा खनिजों जैसे- आयरन, आयोडीन, जिंक, विटामिन ए और डी को चावल, दूध एवं नमक आदि मुख्य खाद्य पदार्थों में शामिल करना है ताकि उनकी पोषण सामग्री में सुधार हो सके।

D) राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम- 2013 में संसद द्वारा “राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम’ पारित किया गया I इसके अंतर्गत 75% ग्रामीण और 50% नगरीय जनसंख्या को सस्ती दरो पर अनाज प्रदान किया जाता है I

E) ईट राइट इण्डिया मूमेंट – भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफ़.एस.एस.ए.आई) द्वारा नागरिकों को उचित खाद्य पदार्थो को भोजन में शामिल करने के लिए प्रेरित किये जाने हेतु इस पहल की शुरुआत की गईI

F) आंगनबाड़ी, मिड डे मील जैसी योजनाओं के माध्यम से पोषणयुक्त भोजन प्रदान किया जा रहा है I

सतत विकास लक्ष्य और भुखमरी

'ज़ीरो हंगर' का लक्ष्य कई अन्य लक्ष्यों जैसे- गरीबी उन्मूलन (एस.डी.जी-1), भुखमरी (एस.डी.जी 2 ),बेहतर स्वास्थ्य और कल्याण (एस.डी.जी-3) तथा स्वच्छ पेयजल (एस.डी.जी-6) के साथ मिलकर काम करता है।

आगे की राह

  1. नन्दी फाउन्डेशन ने अपने सर्वे में भारत में कुपोषण से निपटने संबंधी नीतियों में खामी को उजागर करते हुए कहा था-‘ भारत की कुपोषण नीति गर्भवती महिलाओं को लक्षित करती हैI’ जबकि गर्भवती महिला के कुपोषण को खत्म करने के लिए मुश्किल से 6 माह का समय मिलता है जो अपर्याप्त हैI इसलिए भारत सरकार को ‘कुपोषित किशोरियों को भी लक्षित करना चाहिए’I इससे कुपोषण से निपटने के लिए ‘2 से 4 साल तक का वक़्त मिलेगा, जो पर्याप्त होगा I
  2. समेकित बाल विकास सेवाओं, जन-वितरण प्रणाली का उचित क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाये I
  3. कुपोषण की पहचान कर उन परिवारों को पोषण सुरक्षा मुहैया कराने की आवश्यकता है I
  4. पोषण पुनर्वास केन्द्रों एवं स्वास्थ्य केन्द्रों में उपयुक्त उपकरण एवं पर्याप्त संख्या में बेड का प्रबंध करना I
  5. मोटे अनाज, दालों, हरी सब्जियों को फ़ूड हैबिट में शामिल करने की दिशा में जनजागरूकता फैलाना I
  6. शिक्षा की दशा सुधार कर गरीबी कम करने और बाल विवाह पर प्रतिबन्ध लगाना चाहिए I क्योंकि कम उम्र में माँ बनने से माँ और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है I माँ के कुपोषित होने से बच्चे पर कुपोषण का खतरा बढ़ जाता है I
सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2
  • गरीबी और भूख