जम्मू-कश्मीर परिसीमन रिपोर्ट - समसामयिकी लेख

की-वर्ड्स :- पुनर्गठन अधिनियम, 2019, परिसीमन आयोग या सीमा आयोग, पीओके, अनुसूचित जनजाति (एसटी), भौगोलिक विशेषताएं, जनसांख्यिकीय स्थिति।

चर्चा में क्यों?

  • कई आपत्तियों और विस्तारों के उपरांत हाल ही में जम्मू-कश्मीर परिसीमन आयोग ने जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 द्वारा निर्धारित जनादेश के अनुसार जम्मू और कश्मीर में चुनावी सीमाओं को फिर से बनाने के लिए नियुक्त किए जाने के दो साल बाद अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की।

क्या है परिसीमन ?

  • भारत के चुनाव आयोग के अनुसार परिसीमन लोकसभा या विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से परिभाषित करने की प्रक्रिया है।
  • परिसीमन की प्रक्रिया किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की जनसांख्यिकीय स्थिति में बदलाव के अनुसार की जाती है।
  • परिसीमन की प्रक्रिया एक परिसीमन आयोग या सीमा आयोग द्वारा संचालित की जाती है। यह स्वतंत्र निकाय है तथा इसके अनुशंसा को किसी न्यायालय में प्रश्नगत नहीं किया जा सकता।
  • इसके पूर्व 1952, 1963, 1973 और 2002 में परिसीमन आयोग का गठन किया गया था।
  • जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निरस्त करने से पूर्व इसकी विधानसभा सीटों का परिसीमन जम्मू और कश्मीर संविधान और जम्मू और कश्मीर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1957 द्वारा किया जाता था।
  • परन्तु लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन संविधान द्वारा शासित था।

जम्मू-कश्मीर परिसीमन आयोग के विषय में :-

  • इसके पूर्व जम्मू और कश्मीर में परिसीमन 1995 में किया गया था तथा यह परिसीमन 1981 की जनगणना पर आधारित था।
  • जम्मू और कश्मीर उस समय राष्ट्रपति शासन के अधीन था। घाटी में तनावपूर्ण स्थिति के कारण 1991 में जम्मू-कश्मीर में कोई जनगणना नहीं हुई थी।
  • 2001 में, जम्मू और कश्मीर विधानसभा ने 2026 तक परिसीमन प्रक्रिया को रोकने के लिए एक कानून पारित किया।
  • जम्मू और कश्मीर राज्य के विभाजन और जम्मू और कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशों के रूप में पुनर्गठित होने के छह महीने बाद, केंद्र ने मार्च 2020 में एक परिसीमन आयोग का गठन किया।
  • सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले आयोग को 2011 की जनगणना के आधार पर और जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के प्रावधानों के अनुसार जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों के परिसीमन का काम सौंपा गया था।
  • परिसीमन योजना को पूरा करने के लिए पैनल को एक साल का समय दिया गया था परन्तु बाद में इस आयोग के कार्यकाल को दो विस्तार दिए गए।
  • प्रस्तुतीकरण पर विचार करने और "भौगोलिक विशेषताएं, संचार साधन, सार्वजनिक सुविधा और क्षेत्रों की निकटता" जैसे कारकों पर विचार करने के बाद, परिसीमन आयोग ने अपनी अंतिम रिपोर्ट जारी की है।

परिसीमन आयोग द्वारा दी गई अंतिम रिपोर्ट की मुख्य बातें :-

जम्मू-कश्मीर दो भागों में बंटा हुआ है :-

  • जम्मू और कश्मीर दो डिवीजनों में विभाजित है, जिसमें जम्मू में 37 विधानसभा सीटें और कश्मीर 46 हैं।
  • आयोग के अंतिम मसौदे के उपरांत, छह अतिरिक्त विधानसभा सीटें जम्मू (संशोधित 43) के लिए और एक अतिरिक्त सीट कश्मीर के लिए (47 में संशोधित) के लिए निर्धारित की गई हैं। इससे केंद्रशासित प्रदेश में विधानसभा सीटों की कुल संख्या 83 से बढ़कर 90 हो जाएगी।

कम से कम दो कश्मीरी पंडितों को मनोनीत करें :-

  • आयोग ने केंद्र से सिफारिश की है कि वह विधानसभा के लिए कम से कम दो कश्मीरी पंडितों को मनोनीत करे।

अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए नौ सीटें :-

  • पैनल ने अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के लिए नौ सीटों का प्रस्ताव किया है। इनमें जम्मू (बुधल, गुलाबगढ़, सुरनकोट, राजौरी, मेंढर, थानामंडी) में छह और घाटी में तीन (गुरेज़, कंगन, कोकरनाग) शामिल होंगे। जम्मू क्षेत्र में सात सीटें अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित की गई हैं।

पीओके से विस्थापित व्यक्तियों को प्रतिनिधित्व :-

  • आयोग ने यह भी सिफारिश की है कि सरकार पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर से विस्थापित व्यक्तियों को नामांकन के माध्यम से विधानसभा में प्रतिनिधित्व देने पर विचार करे।

एक एकल केंद्र शासित प्रदेश के रूप में जम्मू और कश्मीर क्षेत्र :-

  • अपने अंतिम आदेश में, आयोग ने निर्धारित किया है कि उसने "जम्मू और कश्मीर क्षेत्र को एक एकल केंद्र शासित प्रदेश" माना है और कश्मीर क्षेत्र के अनंतनाग निर्वाचन क्षेत्र के साथ राजौरी और पुंछ (जम्मू संभाग से) का विलय कर दिया है। नए निर्वाचन क्षेत्र का नाम बदलकर किश्तवाड़-राजौरी कर दिया गया है।

जनता की भावना को देखते हुए 13 निर्वाचन क्षेत्रों के नाम में परिवर्तन :-

  • आयोग ने कहा है कि उसने क्षेत्र में जनभावना को देखते हुए 13 निर्वाचन क्षेत्रों का नाम बदल दिया है। आदेश से पता चलता है कि कश्मीर में गुलमर्ग (तांगमर्ग से), हजरतबल, जदीबल, लालचौक, ईदगाह के नाम बहाल कर दिए गए हैं। जम्मू क्षेत्र में गुलाबगढ़ निर्वाचन क्षेत्र का नाम बहाल कर दिया गया है।

सात और विधानसभा सीटें जोड़ी गईं :-

  • आयोग ने 2011 की जनगणना को आधार मानकर सात और विधानसभा सीटें जोड़ी हैं। इसके साथ, 53 लाख (122 करोड़ की कुल आबादी का 43%) की आबादी वाले जम्मू में 47% सीटें होंगी, जबकि 68 लाख (56%) की आबादी वाले कश्मीर में 52% सीटें होंगी।

निष्कर्ष :-

  • जम्मू और कश्मीर के लिए परिसीमन आयोग का अंतिम आदेश बहुत अधिक राजनीतिक महत्व रखता है। परिसीमन प्रक्रिया पूर्ण होने से विधानसभा चुनावों का मार्ग प्रशस्त होगा-जम्मू और कश्मीर के लिए राज्य की संभावित बहाली में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

स्रोत :- The Hindu

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2:
  • संसद और राज्य विधानसभाएं- संरचना, कामकाज, व्यवसाय का संचालन, शक्तियां और विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले मुद्दे।

मुख्य परीक्षा प्रश्न:

  • परिसीमन क्या है? चुनावी सीमाओं के पुनर्निर्धारण का जम्मू-कश्मीर के लोगों पर क्या प्रभाव पड़ेगा? [250 शब्द]