3डी या थ्री-डायमेंशनल मैपिंग (3D or Three-dimensional Mapping) : डेली करेंट अफेयर्स

3डी या थ्री-डायमेंशनल मैपिंग (3D or Three-dimensional Mapping)

हममें से कई लोगों ने 3D गेम या 3D मूवी जरूर देखी होगी। इनको देख कर ऐसा लगता है कि जैसे वो बिल्कुल आपके सामने वास्तव में ही हों। कुछ इसी तरह की तकनीक है 3D मैपिंग।

हाल ही में, बृहन्मुंबई नगर निगम यानी BMC ने पहली बार 3D मैपिंग की। BMC ने कहा कि यह 3D मैपिंग शहर को बेहतर शहरी शासन, बुनियादी ढांचे में सुधार और आपदा प्रबंधन आदि में मदद करेगी।

3डी या थ्री-डायमेंशनल मैपिंग एक तकनीक है जिसकी मदद से किसी भी जगह की डिजिटल त्रिविमीय आकृति तैयार की जा सकती है। उदाहरण के तौर पर अगर हम मुंबई शहर को ही ले लें तो इस तकनीक से यहां के प्राकृतिक क्षेत्रों जैसे कि वाटर बॉडीज, खुली जगहों, पेड़ों, सड़कों और इमारतों आदि का एक डिजिटल नक्शा तैयार किया जा सकता है। थोड़ा और आसान शब्दों में कहें तो जिस तरह से हम कागज पर किसी घर का चित्र बनाते हैं वह चित्र दो विमा वाला होता है यानी उसमें लंबाई और चौड़ाई होती है। अगर इसी चित्र को हम थर्माकोल की मदद से घर के एक छोटे से मॉडल के रूप में तैयार कर दें तो यह त्रिविमीय हो जाता है। इसमें लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई तीनों शामिल होते हैं।

बीएमसी द्वारा 3डी मैपिंग के लिए, भू-स्थानिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया। बता दें कि भू-स्थानिक टेक्नोलॉजी, ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS), भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) और रिमोट सेंसिंग (RS) का एक मिश्रित स्वरूप है। इसके अलावा, 3डी मैपिंग तैयार करने के लिए ड्रोन की मदद से पूरे इलाके के हाई डेफिनेशन इमेजेस निकाले गए और साथ ही लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग (LiDAR) सेंसर से युक्त मोबाइल स्ट्रीट इमेजरी वाहन का भी इस्तेमाल किया गया।

बदलते दौर में शहरी प्लानिंग के लिए सावधानीपूर्वक विचार और विशेष सिविल इंजीनियरिंग कौशल की आवश्यकता होती है। 3D मैपिंग तकनीक की मदद से ये काम काफी आसान हो जाने वाला है। इसकी मदद से सरकारें सड़क, पुल और रेलवे समेत तमाम दूसरी तरह की विकास परियोजनाओं को आसानी से पूरा कर पाएंगी। इस तकनीक का इस्तेमाल तमाम अन्य क्षेत्रों मसलन उद्योगों, आभूषण निर्माण, शिक्षा के क्षेत्र में, चिकित्सा क्षेत्र में और विनिर्माण क्षेत्र आदि में भी किया जा सकता है।