संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद (ECOSOC) : डेली करेंट अफेयर्स

हाल ही में, भारत को संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद (UN ECOSOC) के चार प्रमुख निकायों के लिए चुना गया है। इसमें सामाजिक विकास आयोग, गैर सरकारी संगठनों की समिति, विकास के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी आयोग और आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों के लिए समिति शामिल हैं।

India elected to UN Economic and Social Council : Daily Current ...

संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद (UN ECOSOC) का गठन साल 1945 में किया गया था। यह यूएन के 6 प्रमुख संस्थाओं में से एक है। यह परिषद संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के तहत आपसी बातचीत और नवाचारी सोच को बढ़ावा देने, विकास के लिए आपसी सहयोग पर बल देने और अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर सहमत लक्ष्यों को हासिल करने के लिए आपसी समन्वय के लिहाज से एक केन्द्रीय मँच है। यहाँ संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख सम्मेलनों और शिखर बैठकों का आयोजन किया जाता है। संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत परिषद का मुख्य काम अन्तरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग के माध्यम से बेहतर जीवन स्तर को बढ़ावा देना है। बीस अन्तरराष्ट्रीय संगठन, क्षेत्रीय आयोग और स्वायत्त संस्थाएँ हर साल आर्थिक एवं सामाजिक परिषद को रिपोर्ट सौंपतीं हैं।

बात इसके उपलब्धियों की करें तो 23 जनवरी, 1946 को लंदन में यूएन आर्थिक और सामाजिक परिषद की पहली बैठक का आयोजन किया गया था और तब से लेकर अब तक इस परिषद ने अपनी क्षमता के मुताबिक कई महत्वपूर्ण कामों को पूरा किया है। इस संस्था की सबसे बड़ी प्रासंगिकता यही है कि यह सतत विकास के तीन आयामों - आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरण - को यूएन प्रणाली में अहमियत दिलाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। विकास के मुख्य सिद्धांतों जैसे कि 0.7 प्रतिशत आधिकारिक विकास सहायता का लक्ष्य, स्पेशल ड्राइन्ग राइट्स और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में विकासशील देशों के साथ विशेष बर्ताव, ये सभी परिषद की चर्चाओं के परिणामस्वरूप ही संभव हो पाये हैं। इसके अलावा, वैश्विक विकास लक्ष्यों और रणनीतियों को पारित करने में भी परिषद की अहम भूमिका रही है। इनमें सहस्राब्दी विकास लक्ष्य यानी MDG, टिकाऊ विकास का 2030 एजेण्डा और टिकाऊ विकास के 17 लक्ष्य शामिल हैं।

भारत ने भी संयुक्त राष्ट्र के विकास कार्यों और ECOSOC का सक्रिय रूप से समर्थन किया है। ECOSOC के पहले अध्यक्ष रामास्वामी मुदलियार एक भारतीय थे। वह 1946 में परिषद के पहले और दूसरे सत्र और 1947 में चौथे सत्र के अध्यक्ष रहे। 1990 में चिन्मय रजनीनाथ घरेखन एक अन्य भारतीय हैं जो इसके अध्यक्ष बने थे। भारत ने सतत विकास लक्ष्यों समेत ECOSOC एजेंडे को आकार देने में भी योगदान दिया। आज, अपने घरेलू प्रयासों के जरिए हम फिर से एजेंडा 2030 और सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में एक प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। हम अन्य विकासशील देशों को उनके सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी सहयोग कर रहे हैं। मौजूदा वक़्त में भारत ECOSOC का सदस्य है। वर्ष 2022-2024 के लिए भारत को एशिया प्रशांत क्षेत्र के तौर पर इस परिषद का सदस्य चुना गया है। इस तरह अब यह इसके 54 सदस्यों में से एक है।