अमर जवान ज्योति : क्या है विवाद? (Amar Jawan Jyoti: What is the Controversy?) : डेली करेंट अफेयर्स

पिछले 50 सालों से राजधानी दिल्ली में इंडिया गेट पर अमर जवान ज्योति इसकी पहचान बन चुकी थी, लेकिन बीते 21 जनवरी को इस अमर जवान ज्योति का राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर जल रही लौ में विलय कर दिया गया।

दरअसल हाल ही में इंडिया गेट स्थित अमर जवान ज्योति का राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की ज्योति में समारोहपूर्वक विलय कर दिया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता एकीकृत रक्षा स्टाफ प्रमुख एयर मार्शल बलभद्र राधा कृष्णा द्वारा की गई। विपक्ष ने इस कदम पर आपत्ति जताई है.

विश्व युद्ध में प्राणों की आहुति देने वाले भारत-ब्रिटेन के 70 हजार सैनिकों के सम्मान में साल 1931 में इंडिया गेट का उद्घाटन किया गया था। 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद अमर जवान ज्योति स्थापित की गई थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 26 जनवरी 1972 को इसका उद्घाटन किया था। वहीँ राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का निर्माण केंद्र सरकार ने साल 2019 में किया था। इसे 1947 में देश की आजादी के बाद से अब तक शहादत दे चुके 26,466 भारतीय जवानों के सम्मान में निर्मित किया गया था। 25 फरवरी 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस स्मारक का उद्घाटन किया था। इस मेमोरियल में अमर चक्र, वीर चक्र, त्याग चक्र और रक्षा चक्र नामक 4 चक्र बने हुए हैं। इनमें से अमर चक्र पर 15.5 मीटर ऊंचा स्मारक स्तंभ है जिसमें अमर ज्योति जलती है। सुरक्षा चक्र में 600 पेड़ हैं जो देश की रक्षा में तैनात जवानों को दर्शाते हैं। नेशनल वॉर मेमोरियल के पास ही 21 परमवीर चक्र पुरस्कार विजेताओं की कांस्य से प्रतिमाएं भी बनाई गई हैं।

हालिया फैसले पर सरकार का कहना है कि अमर जवान ज्योति की लौ के माध्यम से 1971 और अन्य युद्धों के शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई, लेकिन उस जगह पर ढेर सारे शहीदों का कोई नाम-पता मौजूद नहीं है। इंडिया गेट पर अंकित नाम केवल कुछ शहीदों के हैं, जिन्होंने प्रथम विश्व युद्ध और एंग्लो-अफगान युद्ध में अंग्रेजों के लिए लड़ाई लड़ी थी। इस तरह यह हमारे औपनिवेशिक अतीत का प्रतीक है। जबकि राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में 1971, उसके पहले और बाद के युद्धों समेत बाकी युद्धों के सभी भारतीय शहीदों के नाम रखे गए हैं। इसलिए वहां शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करना एक सच्ची श्रद्धांजलि है। हालांकि इस मुद्दे पर सरकार को विपक्ष के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। कई विपक्षी पार्टियों का कहना है कि वीर जवानों के लिए जलने वाली अमर ज्योति को बुझाकर सरकार शहीदों का अपमान कर रही है।

विरोध पर सरकार ने सफाई देते हुए कहा कि अमर जवान ज्योति का राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की लौ में विलय को लेकर काफी गलतफहमियां हैं। अमर जवान ज्योति को बुझाया नहीं जा रहा है, बल्कि इसका नेशनल वॉर मेमोरियल पर प्रज्जवलित ज्योति के साथ विलय किया जा रहा है।