बंगाल मॉनिटर छिपकली (Bengal Monitor Lizard) : डेली करेंट अफेयर्स

महाराष्ट्र के सह्याद्रि टाइगर रिजर्व में बंगाल मॉनिटर छिपकली के साथ कथित रूप से कुकृत्य करने के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

बंगाल मॉनिटर छिपकली वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 (Wildlife Protection Act 1972) के तहत एक संरक्षित प्रजाति है।

किसी पशु या वन्यजीव आदि के साथ यौनाचार करना अप्राकृतिक यौनाचार की श्रेणी में आता है। इसलिए पुलिस इस तरह के मामलों में आरोपी के खिलाफ भारतीय वन्य जीव संरक्षण (संशोधित) अधिनियम 2002 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) की धारा 377 के तहत भी कार्रवाई करती है।

आईपीसी (IPC) की धारा 377 में जानवरों के साथ संबंध बनाने पर सजा का प्रावधान है। ऐसे मामले में दोषी पाए जाने वाले शख्स को 10 साल की सजा या अधिकतम आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।

Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960) के तहत पशुओं को पीड़ा कष्ट देने के लिए अधिकतम 3 साल की सजा हो सकती है या संबंधित व्यक्ति पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

वहीं वन्य जीव संरक्षण अधिनियम , 1972 के तहत कम से कम 3 और अधिकतम 7 साल कारावास की सजा हो सकती है. साथ ही उस पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

बंगाल मॉनिटर लिजर्ड वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट, 1972 के तहत एक शेड्यूल 1 स्पीसीज है यानि जिसे संरक्षण की उच्चतम व्यवस्था मिली हुई है। इसके मीट , बोन , ब्लड और ऑयल के लिए इसे मारा जाता है।

खाल से बहू मूल्य चमड़ा, मांस से बीमारियों का इलाज एवं खून और हड्डियों से कामोत्तेजक औषधि पाने के लिए इसका शिकार होता है। अंधविश्वासों के आधार पर बंगाल मॉनिटर लिजर्ड का सर्वाधिक बिकने वाला अंग उसका जननांग है जिसे आदिवासी लोग समृद्धि आने का रास्ता मानते हैं।

यह eastern Iran, Afghanistan, India, Nepal, Sri Lanka, Pakistan, Bangladesh and Burma में पाया जाता है। IUCN ने अपने रेड डेटा लिस्ट में इसे लीस्ट कंसर्न की श्रेणी में रखा है।

भारत में मॉनिटर लिजर्ड की चार प्रजातियां पाई जाती हैं जिनमें शामिल हैं : बंगाल , येलो , डेजर्ट और वाटर मॉनिटर लिजर्ड। ये मध्य हिमालय से पश्चिमी घाट तक फैले हैं। बंगाल मॉनिटर को कॉमन इंडियन मॉनिटर भी कहते हैं जिनकी लंबाई 61 से 175 सेंटीमीटर तक होती है।

इसे पश्चिमी भारत में विष कोबरा , राजस्थान में गोयरा , पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में गोशाप और पंजाब , बिहार में गोह बोलते हैं। इसके अंगों की तस्करी की जाती है क्योंकि इसे यौन शक्ति को बढ़ावा देने वाला माना जाता है।