ब्लू फ्लैग (Blue Flag) : डेली करेंट अफेयर्स

ब्लू फ्लैग (Blue Flag)

हाल ही में, दो भारतीय समुद्र तटों को प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय इको-लेबल ‘ब्लू फ्लैग’ सर्टिफिकेट प्रदान किया गया। इसमें तमिलनाडु का कोवलम बीच और पुदुचेरी का इडेन बीच शामिल है। अब तक भारत में आठ समुद्र तटों को यह प्रमाणन मिला है। इनमें शिवराजपुर-गुजरात, घोघला-दीव, कासरकोड और पदुबिद्री-कर्नाटक, कप्पड-केरल रुशिकोंडा- आंध्र प्रदेश, गोल्डन-ओडिशा और राधानगर- अंडमान और निकोबार शामिल हैं। इस तरह अब भारत में ‘ब्लू फ्लैग’ प्रमाणन वाले समुद्र तटों की कुल संख्या 10 हो गयी है।

‘ब्लू फ्लैग’ किसी भी समुद्री तट यानी बीच को दिया जाने वाला एक ख़ास क़िस्म का प्रमाण-पत्र होता है जो ‘फ़ाउंडेशन फॉर इनवॉयरमेंटल एजुकेशन’ नाम के एक अंतर्राष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन द्वारा दिया जाता है। इस संगठन का मक़सद पर्यावरणीय जागरुकता के ज़रिए सतत विकास को बढ़ावा देना है। डेनमार्क के कोपनहेगन शहर स्थित इस संगठन द्वारा ‘ब्लू फ्लैग’ सर्टिफ़िकेट की शुरुआत साल 1985 में की गई थी। ‘ब्लू फ्लैग’ सर्टिफिकेशन के अलावा इस संस्था ने चार और कार्यक्रम चला रखे हैं - जिनमें इको-स्कूल्स, यंग रिपोर्टर्स फॉर द एनवायरनमेंट, लर्निंग फॉर फॉरेस्ट और ग्रीन की इंटरनेशनल शामिल हैं।

ब्लू फ्लैग मानकों के तहत समुद्र तट को पर्यावरण और पर्यटन से जुड़े 33 शर्तों को पूरा करना होता है। इन शर्तों को चार व्यापक वर्गों में बाँटा गया है, जिनमें -

(i) पर्यावरण शिक्षा और सूचना
(ii) नहाने वाले पानी की गुणवत्ता
(iii) पर्यावरण प्रबंधन और
(iv) सुरक्षा समेत अन्य सेवाएं शामिल हैं।

अगर किसी समुद्री तट को ब्लू फ्लैग का सर्टिफिकेट मिल जाता है तो इसका मतलब वो बीच प्लास्टिक मुक्त, गंदगी मुक्त और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जैसी सुविधाओं से लैस है। साथ ही, वहां आने वाले सैलानियों के लिए साफ पानी की मौजूदगी, अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक पर्यटन सुविधाएँ और समुद्र तट के आसपास पर्यावरणीय प्रभावों की जानकारी जैसी सुविधाएँ भी चुस्त-दुरुस्त होनी चाहिए।

भारत ने ‘ब्लू फ्लैग’ मानकों के मुताबिक अपने समुद्र तटों को विकसित करने का पायलट प्रोजेक्ट दिसंबर 2017 में शुरु किया था। इस परियोजना के दो मूल मक़सद थे - पहला, भारत में लगातार गंदगी और प्रदूषण के शिकार होते समुद्र तटों को इस समस्या से निजात दिलाकर इनका पर्यावास दुरुस्त करना और दूसरा, सतत विकास और पर्यटन सुविधाओं को बढ़ाकर भारत में इको फ्रेंडली पर्यटन विकसित करना। भारत के इन्ही कोशिशों के चलते पिछले साल, देश के आठ समुद्री बीचेज यानी तटों को प्रतिष्ठित ब्लू फ्लैग सर्टिफिकेशन प्राप्त हुआ था। इस उपलब्धि के बाद भारत दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया था जिसने एक ही बार में अपने 8 बीचेज के लिए ‘ब्लू फ्लैग’ दर्जा हासिल किया था। साथ ही, भारत एशिया-पैसेफिक क्षेत्र में महज 2 साल के अंदर ब्लू फ्लैग दर्जा हासिल करने वाला भी पहला देश बन गया है।

भारत में, समुद्री तटों को ‘ब्लू फ्लैग’ के मानकों के मुताबिक विकसित करने का काम ‘सोसायटी फॉर इंटीग्रेटेड कोस्टल मैनेजमेंट’ यानी SICM नाम की संस्था कर रही है। SICM पर्यावरण मंत्रालय के मातहत काम करती है।