बॉर्डर टूरिज्म (Border Tourism) : डेली करेंट अफेयर्स

अगर आप कभी पंजाब के अमृतसर में मौजूद अटारी-वाघा बॉर्डर पर घूमने के मकसद से गए होंगे तो आपने वहां का बीटिंग रिट्रीट सेरिमनी जरूर देखा होगा। अगर नहीं भी गए होंगे तो टीवी पर या फिर यूट्यूब पर तो देखा ही होगा। हर रोज दिन ढलते ही दोनों देशों के जवान अपने-अपने फ्लैग को उतारने के लिए एक ड्रिल करते हैं। इस ड्रिल के दौरान दोनों देश के जवान शक्ति-प्रदर्शन करते भी नजर आते हैं। इसमें भारी संख्या में दोनों देशों की दर्शक दीर्घाओं में लोग मौजूद रहते हैं। देशभक्ति के माहौल में पूरा रोम-रोम रोमांचित हो उठता है। एक अच्छा समाचार यह है कि अब ऐसी ही सेरेमनी आप गुजरात के नाडाबेट में देख पाएंगे और सुरक्षाबलों के त्याग, वीरता और शौर्य को महसूस कर पाएंगे।

कोरोना जैसी एक क्रूर महामारी ने देश की बुनियाद को कैसे हिला दिया, इसको जानने के लिए हमें एक नहीं बल्कि कई पहलुओं को समझना होगा। इन्हीं में से एक है प्रवासियों और पलायन की समस्या। पलायन की समस्या का जिक्र आते ही हमारे जेहन में सबसे पहले बीमारू राज्यों की छवि उभर कर आती है, लेकिन ऐसा नहीं है कि सिर्फ इन्हीं राज्यों में पलायन की समस्या मौजूद है। देश के सीमावर्ती इलाके भी पलायन का दंश बुरी तरीके से झेल रहे हैं। देश की अंतरराष्ट्रीय सीमावर्ती इलाकों में सुविधाओं की कमी, बेहतर शिक्षा व स्वास्थ्य व्यवस्था और रोजगार न होने के चलते ग्रामीण इलाकों से पलायन हो रहा है। ऐसा होना देश की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है। इसी के मद्देनजर, देश की सीमाओं से युवाओं को रूबरू करवाने और बार्डर एरिया के ग्रामीण इलाकों से पलायन रोकनेे के लिए केंद्र सरकार ‘बार्डर टूरिज्म’ शुरू करने के प्रयास में लगी हुई है। इसे जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, राजस्थान, पश्चिम बंगाल से लेकर पूर्वोत्तर तक लागू करने की कोशिश है।

‘बॉर्डर टूरिज्म’ के तहत सबसे पहले ग्रामीण इलाकों में सुविधाओं को बढ़ाया जाएगा। यानी अगर घर के पास अच्छी शिक्षा और रोजगार के बेहतर मौके मिले तो पलायन पर लगाम लग सकता है। दूसरा, अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पर्यटकों के चलते चहल-पहल बढ़ेगी। पर्यटकों के आने से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा। इसके अलावा, सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा में इजाफा होगा। युवा पीढ़ी को अपना बार्डर देखने का मौका भी मिलेगा। इसी सोच के तहत ‘बॉर्डर टूरिज्म’ को लेकर सरकार विभिन्न राज्य सरकारों के साथ मिलकर एक्शन प्लान तैयार कर रही है। इसी क्रम में गुजरात राज्य के पर्यटन विभाग और बीएसएफ गुजरात फ्रंटियर द्वारा संयुक्त रुप से 125 करोड़ रुपये की लागत से एक सीमा दर्शन प्रोजेक्ट शुरू किया गया है।

इसी प्रोजेक्ट के तहत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बीते 10 अप्रैल को गुजरात के बनासकांठा स्थित नाडाबेट में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर एक दर्शनीय स्थल (व्यूप्वाइंट) का उद्घाटन किया। नडाबेट की खास बात यह है कि यहां जमीनी बॉर्डर के साथ-साथ फेंसिंग भी की गई है। यह प्रदेश का ऐसा पहला बॉर्डर प्वाइंट होगा जिसे एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण के रूप में विकसित किया गया है। साथ ही, यह देश में पहला ऐसा बॉर्डर प्वाइंट होगा, जहां रीट्रीट सेरेमनी के साथ-साथ दर्शक दीर्घा व फोटो गैलरी भी होगी। हालाँकि यहाँ के रिट्रीट सेरेमनी में पाकिस्तान की सेना शामिल नहीं होगी। यहां हथियारों-टैंकों का भी प्रदर्शन किया जाएगा। हमने गूगल मैप के जरिए नडाबेट के लोकेशन का एक स्क्रीनशॉट लिया है जिसे आप अपने स्क्रीन पर देख सकते हैं। नडाबेट का प्वाइंट भारत-पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा से करीब 20 से 25 किमी. पहले बनाया गया है, इसलिए यहां पर सुरक्षा से सम्बंधित कोई खतरा नहीं है। आपको बता दें कि 1971 के भारत-पाक युद्ध में नाडाबेट की काफी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।