चेरी ब्लॉसम (Cherry Blossom) : डेली करेंट अफेयर्स

हाल ही में भारत में सकुरा जिसे चेरी ब्लॉसम भी कहते हैं, कि नई प्रजाति खोजी गई है। यह नई प्रजाति भारतीय राज्य मणिपुर में खोजी गई है। Cherry Blossom अथवा Sakura जापान का राष्ट्रीय पुष्प ( National flower ) है ।

भारत के मणिपुर में इसकी नई प्रजाति की खोज के साथ ही भारत Sakura Map में शामिल होने वाला 28वां देश बन गया है। इसका मतलब है कि भारत सहित 28 देशों में यह फूल पाया जाता है।

मणिपुर में खोजे गए चेरी ब्लॉसम के इस नए प्रजाति का नाम दिल्ली विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञानी प्रोफेसर Dr Dinabandhu Sahoo के नाम पर रखा गया है। इसका नाम Prunus Dinabandhuana रखा गया है।

ऐसा इसलिए है कि 2016 में डॉक्टर साहू ने ही भारत के पहले cherry blossom festival का आयोजन शिलांग में कराने की योजना बनाई थी। डॉक्टर साहू अंटार्कटिका की यात्रा करने वाले पहले भारतीय छात्र थे ।

जापान जैसे देशों में चेरी ब्लॉसम बसंत में दिखाई देते हैं। जापानी चेरी ब्लॉसम वृक्ष का वैज्ञानिक नाम ‘प्रून्स येदोएंसिस’ (Prunus yedoensis) है जिसे सामान्यतः ‘सोमी योशिमा’ (Somei Yoshima) के नाम से जाना जाना जाता है।

उत्तर-पूर्वी भारत मुख्यतः शिलांग में चेरी ब्लॉसम का वैज्ञानिक नाम ‘प्रून्स ‘सेरासोइड्स’ (Prunus cerasoides) है। इसे ‘जंगली हिमालयी चेरी ब्लॉसम इन ऑटम’ (Wild Himalayan Cherry and blossoms in autumn) के नाम से भी जाना जाता है।

इसके फल खाने योग्य होते हैं परन्तु ब्लॉसम के मौसम में ये पेड़ हल्के गुलाबी और सफ़ेद रंग के फूलों से भर जाते हैं।

चेरी ब्लॉसम फेस्टिवल, जिसे जापान में सकुरा फेस्टिवल के नाम से जाना जाता है, हर साल अप्रैल में आयोजित किया जाता है। ऑस्ट्रेलिया, कोरिया, चीन, अमेरिका और कुछ अन्य देश त्योहार मनाते हैं जो स्थानीय अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पैदा करने में मदद करता है। साहू ने कहा कि अकेले वाशिंगटन डीसी चेरी ब्लॉसम फेस्टिवल दुनिया भर से हर साल पर्यटकों से लगभग 126 मिलियन डॉलर कमाता है।