ग्रैमी पुरस्कार 2022 (Grammy Awards 2022) : डेली करेंट अफेयर्स

म्यूजिक इंडस्ट्री के सबसे बड़े ग्रैमी अवॉर्ड्स के 64 वें संस्करण की घोषणा कर दी गई है। इस बारे ये अवॉर्ड भारत के लिए खास रहा है, क्यूंकि न्यूयॉर्क में रहने वाली भारतीय-अमेरिकी गायिका फाल्गुनी शाह को ‘ए कलरफुल वर्ल्ड’ के लिए बेस्ट चिल्ड्रेन म्यूजिक एल्बम कैटगरी में ग्रैमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

ग्रैमी अवॉर्ड संगीत की दुनिया में अच्छा काम करने वालों को वार्षिक तौर पर दिया जाता है। ये अमेरिकी संस्था रिकॉर्डिंग अकादमी या नेशनल अकादमी रिकॉर्डिंग्स की ओर से दिया जाता है। इस अवार्ड की एक शर्त ये भी होती है किसी को ग्रैमी अवॉर्ड अवार्ड तभी दिया जाएगा जब उसने अपनी संगीत या रिकॉर्डिंग अमेरिका में रिलीज की हुई हो। ग्रैमी अवॉर्ड एक गोल्ड प्लेटेड ग्रामोफोन के रूप में होती है और पहला अवार्ड 1959 में अमेरिका के लॉस एंजेलिस में आयोजित हुआ था।

इस बार भारतीय मूल की सिंगर फाल्गुनी शाह और रिकी केज ने भी ग्रैमी अवार्ड अपने नाम किया है। न्यूयॉर्क में रहने वाली फाल्गुनी शाह सोशल मीडिया पर फालू शाह नाम से हैं मशहूर हैं। फाल्गुनी भारतीय शास्त्रीय धुनों को आधुनिक पश्चिमी धुनों के साथ मिक्स कर बेहद ही नए तरीके से म्यूजिक को प्रेजेंट करती हैं। फाल्गुनी ने इन क्लासिकल इंडियन धुनों के लिए जयपुर संगीत परंपरा, शहूर सारंगी गायक उस्ताद सुल्तान खान और गुजरात की कोकिला कही जाने वाली कौमुदी मुंशी के ज़रिए ठुमरी की बनारस शैली में ट्रेनिंग ली है।

गुजरात कोकिला कौमुदी मुंशी का जन्म ठुमरी के गढ़ बनारस में हुआ था जहां उन्होंने कजरी, चैती, दादरा और झूला जैसी ठुमरी की शैलियों को शिक्षा हासिल की। ठुमरी की बनारस शैली इसलिए महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्यूंकि यहीं से ठुमरी गायन शैली भक्ति और शृंगार रस में संवरकर खूबसूरत और नए अंदाजों में उभरी है।

बनारस की ठुमरी गायन में बनारस के भारतेन्दु, कबीर, तुलसी की रचनाओं का भी गहरा प्रभाव रहा और ठुमरी की विरल गायिका सिद्धेश्वरी देवी ने लोक और शास्त्रीय संगीत के मिश्रण में नए रूप में दिया है।

आपको बता दें कि भारतीय शास्त्रीय संगीत की उत्पत्ति वेदों से मानी जाती है। सामवेद में संगीत के बारे में गहराई से चर्चा की गई है। भारतीय शास्त्रीय संगीत गहरे तक आध्यात्मिकता से प्रभावित रहा है, इसलिए भारतीय आचार्यों ने इसे पंचम वेद या गंधर्व वेद की संज्ञा दी है। भरत मुनि का नाट्यशास्त्र पहला ऐसा ग्रंथ था जिसमें नाटक, नृत्य और संगीत के मूल सिद्धांतों का प्रतिपादन किया गया है। भारतीय शास्त्रीय संगीत की दो प्रमुख शैलियां हैं - हिंदुस्तानी शैली और कर्नाटक शैली। हिंदुस्तानी शैली के प्रमुख विषय ऋंगार, प्रकृति और भक्ति हैं और इस शैली के प्रमुख रूप ध्रुपद, खयाल, धमार, ठुमरी और टप्पा हैं। जबकि कर्नाटक शैली में रागों का गायन अधिक तेज और हिंदुस्तानी शैली की तुलना में कम समय का होता है। त्यागराज, मुथुस्वामी दीक्षितार और श्यामा शास्त्री को कर्नाटक संगीत शैली की त्रिमूर्ति कहा जाता है, जबकि पुरंदर दास को कर्नाटक शैली का पिता कहा जाता है। इस शैली के प्रमुख रूप वर्णम, जावाली और तिल्लाना हैं।

फाल्गुनी शाह के अलावा भारत के संगीतकार रिकी केज को भी ग्रैमी अवॉर्ड से नवाज़ा गया है। ये दूसरी बार है जब केज को ग्रैमी अवॉर्ड मिला है। अमेरिका में जन्में रिकी केज मूल रूप से बेंगलुरु के हैं। उन्हें उनकी 'बेस्ट न्यू एज एल्बम' का अवॉर्ड अमेरिकी रॉक बैंड 'द पुलिस' के ड्रमर स्टीवर्ट कोपलैंड के साथ मिला है। ये अवॉर्ड उनके एल्बम 'डिवाइन टाइड्स' के लिए दिया गया है।