भारतीय बैंक संघ - आई.बी.ए. (Indian Banks Association - IBA) : डेली करेंट अफेयर्स

भारतीय बैंक संघ - आई.बी.ए. (Indian Banks Association - IBA)

चर्चा में क्यों?

मुंबई में आयोजित इन्डियन बैंक एसोशियेशन की 74वीं जनरल मीटिंग को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जी ने कहा है भारत को तीव्र आर्थिक विकास के लिए स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया जैसी 4 या 5 बैंकों की आवश्यकता है I

पृष्ठभूमि

1969 (बैंकों के राष्ट्रीयकरण के बाद जिस रफ़्तार से भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास हुआ है उसके अनुसार बैंकिंग क्षेत्र में विकास नहीं हो पाया I भारत का केवल एक बैंक विश्व के शीर्ष 100 बैंकों की सूची में शामिल है I

आर्थिक विकास में बैंकों की भूमिका

  1. बैंक आम आदमी को बचत के लिए प्रोत्साहित करते है, उनकी बचत को संग्रहित कर निवेश के लिए निवेशकों को प्रदान करते हैं I जिससे पूंजी निर्माण हो सके जो आर्थिक विकास की पूर्वगामी आवश्यक शर्त है I
  2. बैंक वित्तीय समावेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं I जनधन योजना (जैम – जनधन-आधार मोबाइल ) के बाद से लगभग 79% भारतीयों के पास बैंक खाता है I
  3. बैंक आम जनता की संस्थागत ऋण तक पहुंच सुनिश्चित करने में, बीमा लाभ प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं I

बैंक के समक्ष चुनौतियाँ -

  1. डिजिटल साक्षरता का अभाव साइबर हमलों के प्रति भारत को अति सुभेद्य बनाता है I
  2. डिजिटल गैप की चुनौती से निपटना बैंकिंग क्षेत्र के समक्ष एक बड़ी चुनौती है I
  3. चीन के बाद भारत में दूसरी सबसे बड़ी जनसंख्या निवास करती है जिसकी बैंक खातों तक पहुंच नहीं है I

भारतीय बैंक संघ (आई.बी.ए)

भारतीय बैंकिंग के विकास, समन्वय एवं मजबूती के लिए 1946 में भारतीय बैंक संघ की स्थापना की गयी थी I 22 बैंको के प्रतिनिधित्व करने वाले निकाय के रूप में स्थापित आई.बी.ए में वर्तमान में 237 बैंकिंग कम्पनियों का प्रतिनिधित्व प्रदान करता है I

आई.बी.ए. नई प्रणालियों को कार्यान्वयन एवं सदस्यों के बीच मानकों को अपनाने सहित विभिन्न तरीकों से सदस्य बैंकों की सहायता करता है I

  • बड़े बैंकों के लाभ – छोटे बैंकों का विलय कर बड़े बैंकों का निर्माण करने का सुझाव नरसिम्हन समिति (1991-1998) ने अपनी सिफारिशों में किया था I बड़ी बैंकों के निम्नलिखित लाभ हैं -
  1. बैंकों का आकार बड़ा होने से व्यावसायिक लागत में कमी आती है I
  2. तकनीकी दक्षता बढ़ती है, जिससे बैंकों में होने वाले लेन-देन अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों के अनुसार होते हैं। दक्षता बढ़ने से बैंकिंग उत्पाद व सेवाओं की भी गुणवत्ता बढ़ती है।
  3. व्यावसायिक मानकों में सुधार के अलावा बैंकों का बड़ा आकार होने से भारतीय बैंकिंग प्रणाली सुदृढ़ बनेगी, विशेषकर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में।