रक्षा उत्कृष्टता के लिये नवाचार (Innovations for Defence Excellence - iDEX) : डेली करेंट अफेयर्स

रक्षा उत्कृष्टता के लिये नवाचार (Innovations for Defence Excellence - iDEX)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में भारत सरकार ने रक्षा उत्कृष्टता के लिये नवाचार (Innovations for Defence Excellence- iDEX) पहल को 498.8 करोड़ रुपये की बजटीय सहायता को मंजूरी दी है।

प्रमुख बिन्दु

  • भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में रक्षा उत्कृष्टता के लिये नवाचार (Innovations for Defence Excellence- iDEX) पहल को रक्षा क्षेत्र में नवाचार के लिए 498.8 करोड़ रुपये की बजटीय सहायता को मंजूरी दी है। यह सहायता अगले पांच वर्षों के लिए है।
  • इस बजटीय सहायता से सरकार के 'आत्मनिर्भर भारत अभियान' को बढ़ावा मिलेगा क्योंकि आईडीईएक्स पहल का प्राथमिक उद्देश्य देश की रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और स्वदेशीकरण को बढ़ावा देना है।
  • इस बजटीय सहायता का उद्देश्य डीआईओ फ्रेमवर्क के तहत लगभग 300 स्टार्ट-अप्स/एमएसएमई/व्यक्तिगत नवोन्मेषकों और 20 साझेदार इनक्यूबेटर को वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
  • इसके अलावा, इस योजना का उद्देश्य भारतीय रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र के लिए नई, स्वदेशी और अभिनव प्रौद्योगिकियों के तेजी से विकास को सुगम बनाना है।

रक्षा उत्कृष्टता के लिये नवाचार (Innovations for Defence Excellence- iDEX)

  • रक्षा उत्कृष्टता के लिये नवाचार (Innovations for Defence Excellence- iDEX), भारत सरकार की एक पहल है।
  • इसे वर्ष 2018 में रक्षा उद्योग के आधुनिकीकरण हेतु लॉन्च किया गया था।
  • रक्षा उत्कृष्टता के लिये नवाचार (iDEX) को रक्षा नवाचार संगठन (Defence Innovation Organization- DIO) द्वारा वित्त पोषित और प्रबंधित किया जाता है।

रक्षा नवाचार संगठन (Defence Innovation Organization- DIO)

  • रक्षा नवाचार संगठन (Defence Innovation Organization- DIO) को कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत गठित किया गया है।
  • यह एक नान प्राफ़िट कंपनी है।
  • इसके दो संस्थापक सदस्य हैं- हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) ।
  • हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) भारत सरकार के रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (डीपीएसयू) हैं।

डीआईओ का उद्देश्य

  • डीआईओ की स्थापना का उद्देश्य एमएसएमई, स्टार्ट-अप्स, व्यक्तिगत नवोन्मेषकों, अनुसंधान एवं विकास संस्थानों और शिक्षाजगत समेत अन्य उद्योगों को शामिल करके रक्षा और एयरोस्पेस में नवाचार और प्रौद्योगिकी विकास को बढ़ावा देना है।
  • इसके अलावा, उन्हें अनुसंधान और विकास करने के लिए अनुदान/वित्तपोषण और अन्य सहायता प्रदान करना है।