क्या जबरन धर्मांतरण पर संविधान में कोई प्रावधान है? : डेली करेंट अफेयर्स

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में एक आदिवासी समुदाय ने कथित तौर पर जबरन धर्मांतरण के मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन किया है। लोग सड़कों पर उतर कर अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं, जिसमें एक एसपी सहित कई अन्य लोग घायल भी हुए हैं।

जबरन धर्मान्तरण होता क्या है?

हमारा संविधान हर किसी को अपनी आस्था, अपना विश्वास और अपना धर्म चुनने का अधिकार देता है, लेकिन समस्या तब हो जाती है, जब कोई व्यक्ति लालच, धोखे या दबाव के चलते धर्म परिवर्तन करता है या उससे इन आधारों पर धर्म परिवर्तन करवाया जाता है। इसे ही जबरन धर्मान्तरण कहा जाता है।

अनुच्छेद-25 के तहत भारतीय संविधान धर्म को मानने, प्रचार करने और अभ्यास करने की स्वतंत्रता देता है, लेकिन कोई भी व्यक्ति अपने धार्मिक विश्वासों को ज़बरन लागू नहीं करेगा। चूँकि भारत कई धर्मों का देश है, इसलिए जबरन मतान्तरण को गलत माना जाता है। जबरन धर्मांतरण में कोई एक विशेष धर्म दूसरे धर्म पर किसी न किसी तरह से हावी हो जाता है और उनके लोगों को अपने धर्म में शामिल करने लगता है। जिससे अलग-अलग धर्मों का अस्तित्व खतरे में आ जाता है।

जबरन धर्मान्तरण से होने वाली समस्याएं

यह संप्रदायवाद और कट्टरपंथ की समस्या को जन्म दे सकता है। इससे समुदायों के बीच आपसी वैमनस्यता बढ़ती है। कभी-कभी धर्मांतरण न करने वालों के साथ हिंसा भी की जाती है। इस हिंसा और वैमनस्यता का लाभ उठाकर कई देश विरोधी ताकतें इसको बढ़ावा देने की जुगत में लग जाती हैं। वे इसकी फंडिंग करती हैं जिससे यह व्यक्तिगत आजादी और देश की सुरक्षा दोनों के लिए घातक हो जाती है।

ता दें कि संविधान के अनुच्छेद 25 से 28 में धार्मिक स्वंतंत्रता का उल्लेख है। जिसके अनुसार हर व्यक्ति को अपने धर्म को मानने और प्रचार-प्रसार करने की अनुमति है लेकिन धर्म के प्रचार-प्रसार का अधिकार जबरन धर्मान्तरण का अधिकार नहीं देता है। वर्ष 1977 में रेव स्टैनिस्लॉस बनाम मध्य प्रदेश राज्य में सुप्रीम कोर्ट ने भी निर्णय दिया था कि अनुच्छेद 25 के तहत किसी का धर्म परिवर्तन कराने का अधिकार शामिल नहीं है। बीते वर्ष नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने फिर से एक बार दोहराया था कि धार्मिक स्वतंत्रता, धर्मांतरण का अधिकार नहीं देती है। अदालत ने आगे कहा था कि अगर इस तरह का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष मतांतरण करवाया जाता है तो राज्य सरकार उचित एक्शन ले सकती है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस जबरन धर्मांतरण को राष्ट्र की सुरक्षा के लिए भी खतरा बताया था।

दरअसल हो ये रहा है कि अभी के विवाद डायरेक्ट जबरन मतान्तरण से जुड़ कर आ ही नहीं रहें हैं। ज्यादातर मामले या तो किसी व्यक्ति विशेष से जुड़ कर आ रहे हैं या फिर परोपकारिता और विकास के नाम पर आ रहे हैं। ऐसे में इन मामलों को पहचानना थोड़ा सा मुश्किल हो जाता है। बहरहाल इसके समाधान के लिए विशेषज्ञों का कहना है कि यह नियमित जाँच का विषय होना चाहिए कि इस तरह की संदिग्ध गतिविधियों में शामिल संस्थाओं अथवा व्यक्तियों को बड़ी मात्रा में धन कौन दे रहा है यानी इनकी फंडिंग की जांच की जानी चाहिए। कई राज्य ऐसे हैं जहां पर जबरन धर्मांतरण के ख़िलाफ़ क़ानून बनाए गए हैं …. ज़रूरत है कि उन्हें सही तरीके से लागू किया जाए। इस मामले में सोशल मीडिया के माध्यम से होने वाली धोखाधड़ी पर निगरानी रखी जाए और साथ ही विकास कार्यों को बढ़ावा देने की जरूरत है ताकि पैसे आदि के लालच में किसी का जबरन धर्मांतरण ना हो।