सोयाबीन तेल से जीएम टैग हटाने की आवश्यकता : डेली करेंट अफेयर्स

प्रासंगिकता/ पाठ्यक्रम से सम्बद्धता की वर्ड- एसईए, ट्रांसजेनिक फसल, अनुवांशिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति (जीईएसी), भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई), ग्रीनपीस, जीएम फसलें, बीटी कपास, ग्लाइफोसेट

चर्चा में क्यों ?

हाल ही में सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (एसईए) द्वारा सोयाबीन तेल को 'जीएम' (आनुवंशिक रूप से संशोधित) लेबलिंग से छूट देने के सम्बन्ध में सरकार से अनुरोध किया गया है।

Need to remove GM tag from Soyabean oil

आनुवंशिक रूप से संशोधित (संवर्धित) फसलें (जीएम फसलें ) क्या हैं?

  • जीएम या ट्रांसजेनिक फसल, ऐसे पौधे हैं जिनमे आनुवंशिक सामग्री का नवीन संयोजन होता है । यह नवीन संयोजन आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी के उपयोग के द्वारा प्राप्त किया जाते है।
  • जीएम फसलों में परागण से उत्पन्न जीन के स्थान पर कृत्रिम रूप से डाले गए जीन पाए जाते हैं।
  • भारत में एकमात्र जीएम फसल, बीटी कपास के उत्पादन की अनुमति है। इसमें मृदा जीवाणु बैसिलस थुरिंजिनेसिस (बीटी) द्वारा प्राप्त बाह्य जीन का प्रयोग होता है। ये फसल को सामान्य कीट गुलाबी बॉलवर्म विकसित करने के लिए विषाक्त प्रोटीन विकसित करने में सहायता करता है।

भारत में जीएम फसलों के लिए अनुमोदन प्रक्रिया

  1. जीएम फसलों के वाणिज्यिक प्रयोग की अनुमति देने वाला शीर्ष निकाय जेनेटिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति (जीईएसी) है।
  2. प्रतिबंधित जीएम फसलों का उपयोग करने पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत 5 वर्ष का कारावास तथा 1 लाख रुपये का अर्थ दंड निर्धारित है ।
  3. भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) भारत में आयातित फसलों को विनियमित करने के लिए अधिकृत निकाय है।

भारत में जीएम सोयाबीन तेल और जीएम सोयाबीन सीड्स की स्थिति

भारत, जीएम सोयाबीन और कैनोला तेल के आयात की अनुमति देता है परन्तु भारत में जीएम सोयाबीन के बीज के आयात को अब तक अनुमोदित नहीं किया गया है।

सोयाबीन तेल से जीएम टैग क्यों हटाया जाना चाहिए?

  • सोयाबीन तेल अपने आप में एक जीएम फ़ूड नहीं है, इसका मूल - यानी सोयाबीन (जिसे विदेश में संसाधित किया जाता है ) - एक जीएम फ़ूड हो सकता है। सोयाबीन से उसके तेल को परिष्कृत करने के उपरान्त परिष्कृत सोयाबीन तेल में किसी भी प्रकार की जीएम विशेषताएं नहीं होतीं । इसके अतिरिक्त यह तर्क भी है कि मानव उपभोग के लिए मात्र केवल रिफाइंड सोयाबीन तेल का ही विक्रय किया जाता है अतः सोयाबीन तेल से जीएम टैग हटा देना चाहिए ।
  • घरेलू स्तर पर उत्पादित (गैर-जीएम सोयाबीन) तेल और आयातित सोयाबीन तेल (जीएम बीज) के लिए एफएसएसएआई द्वारा निर्धारित गुणवत्ता मानदंड समान हैं।
  • उद्योग तथा थोक व्यापारी घरेलू तथा आयातित सोयाबीन तेल का अलग से भण्डारण नहीं करते।
  • एसईए ने तर्क दिया कि अधिकांशतया घरेलू सोयाबीन तेल तथा आयातित सोयाबीन तेल को एक ही तेल टैंकर में रखा जाता है।
  • अभी तक एफएसएसएआई द्वारा तेल तथा वनस्पति वसा में जीएम सामग्री के निर्धारण के लिए परीक्षण पद्धति को अधिसूचित नहीं किया है और न ही एफएसएसएआई ने खाद्य पदार्थों (तेल और वसा) में जीएम कंटेंट के मैनुवल विश्लेषण के उपाय बताये हैं।
  • एसईए ने कहा कि तेल उद्योग के लिए घरेलू तथा आयातित सोयाबीन तेल का पृथक भंडारण व्यावहारिक नहीं है क्योंकि अलग भण्डारण के लिए भारी मात्रा में व्यय करना होगा और इसके उपरान्त भी दोनों को पूर्ण रूप से पृथक करना संभव नहीं होगा।
  • इस बात पर जोर दिया गया है कि जीएम सोयाबीन से उत्पादित सोयाबीन तेल पर 'जीएम' की अनिवार्य लेबलिंग लगाने से गैर-जीएम सोयाबीन से उत्पादित सोयाबीन तेल के लिए कृत्रिम प्रीमियम का कार्य करेगा जो मुद्रास्फीति का कारक बनेगी ।

जीएम फसलों के विरुद्ध तर्क :-

  • ग्रीनपीस जैसे संगठनों का तर्क है कि जीएम फसलें बेहतर परिणाम नहीं देती बल्कि ये किसानों को ऋण से ग्रस्त कर देती हैं।
  • किसानो को बहुराष्ट्रीय निगमों से जीएम बीज और प्रौद्योगिकी खरीदने के लिए मजबूर किया जाएगा। इस स्थिति में वे बीज पर अपना अधिकार खो देते हैं ।
  • बीटी कपास की खेती करने वाले किसानों द्वारा आत्महत्या की बढ़ती घटनाएं भारत जैसे देश में जीएम फसलों द्वारा उत्पन्न संकटो को स्पष्ट रूप से परिलक्षित करती हैं।
  • उपरोक्त तर्कों के अतिरिक्त जीएम फसलों के विरोध में यह तर्क दिया जाता हैं कि जीएम फसल पर्यावरणीय रूप से इर्रिवर्सिबल हैं।
  • जीएम फसलों का मानव स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक नकारात्मक परिणाम भी देखा जाता है । उदाहरण: विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा बीटी कपास के विकास में प्रयुक्त ग्लाइफोसेट को "संभावित कार्सिनोजेन" के रूप में वर्गीकृत किया है।

आगे की राह :-

  • वर्तमान में जीएम फसलों से सम्बद्ध संशय को दूर करने के लिए इस सन्दर्भ में घरेलू अनुसन्धान को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
  • पर्यावरणीय सुरक्षा और प्रभावोत्पादकता की सुदृंढता के लिए मजबूत क्लिनिकल परीक्षणों की आवश्यकता है ।
  • जी-एम फसलों की अनुमति के सन्दर्भ में दो -चरणीय मॉडल स्वीकारने की आवश्यकता है जिसमे एक में सरकार उद्योग समूहों के साथ चर्चा करे जबकि दूसरा चरण का निर्णय अनुसन्धानविदो तथा सरकार के सामंजस्य से लिया जाए।
  • सूचना विषमता को कम करने के लिए एफएसएसएआई जैसे निकायों के नियामक निरीक्षण को मजबूत किया जाना चाहिए तथा जीएम फसलों व गैर-जीएम फसलों का को पृथक रखना चाहिए।

स्रोत- द हिंदू, बीएल, न्यूजपेपर

प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न

प्रश्न. भारत में जीएम फसलों के लिए अनुमोदन प्रक्रिया के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

1. जीईएसी शीर्ष निकाय है, जो जीएम फसलों की व्यावसायिक रिलीज की अनुमति देता है।
2. FSSAI भारत में आयातित GM फसलों को विनियमित करने के लिए अधिकृत निकाय है।
3. हाल ही में, भारत में जीएम सोयाबीन के बीज के आयात को मंजूरी दी गई थी।

निम्नलिखित कूट का प्रयोग कर सही विकल्प का चयन करें ।

a) केवल 1 और 2
b) केवल 1 और 3
c) केवल 2
d) केवल 2 और 3

Answer: (A)

मुख्य परीक्षा प्रश्न

प्रश्न:  आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों और बायोफोर्टिफाइड फसलों में क्या अंतर है? कृषि उत्पादकता और जलवायु नम्यता में जीएम फसलों के महत्व के उपरान्त भी भारत में जीएम फसलों को अपनाने में हुई प्रगति बहुत अच्छी नहीं रही । कारण सहित स्पष्ट कीजिए। (15 अंक)