पराग अग्रवाल ट्विटर के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) : डेली करेंट अफेयर्स

जब हम यह सुनते हैं कि गूगल और माइक्रोसॉफ्ट समेत दुनिया की कई दिग्गज कंपनियों की कमान भारतीयों के हाथ में है तो हमें बहुत गर्व का एहसास होता है। और अब इसी सूची में एक और नया नाम जुड़ गया है पराग अग्रवाल का। दरअसल भारतीय मूल के पराग अग्रवाल को ट्विटर का नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी सीईओ नियुक्त किया है।

हाल ही में, दिग्गज माइक्रोब्लॉगिंग और सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म ट्विटर के सीईओ जैक डोर्सी ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद अब उनकी जगह कंपनी के वर्तमान मुख्य तकनीकी अधिकारी यानी CTO पराग अग्रवाल को कंपनी का नया सीईओ बनाया गया है। इसके साथ ही 37 साल के पराग अब दुनिया की टॉप 500 कंपनियों के सबसे युवा सीईओ बन गए हैं। बता दें कि पराग ने आईआईटी बॉम्बे से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है। इसके अलावा, उन्होंने स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी से कम्प्यूटर साइंस में डॉक्टरेट किया है। पराग अग्रवाल 2011 से ही ट्विटर में काम कर रहे हैं और 2017 से कंपनी के सीटीओ के पद पर नियुक्त थे। CEO बनने के बाद सभी के समर्थन और उन पर भरोसा करने के लिए पराग ने सबको धन्यवाद कहा।

गौरतलब है कि पराग के अलावा गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, Adobe, VMware, Deloitte और आईबीएम जैसी कई अन्य बड़ी कंपनियों के सीईओ भारतीय ही हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर दुनिया की बड़ी दिग्गज कंपनियों के सीईओ भारतीय ही क्यों बन रहे हैं। इस सवाल के जवाब में तमाम विशेषज्ञों की अपनी अलग-अलग राय है मसलन कुछ का कहना है कि भारतीयों का स्वभाव ऐसा है कि वे आसानी से किसी भी संस्कृति को अपना लेते हैं और विदेशों में खासकर अमेरिका में काम करने के इच्छुक रहते हैं। यानी भारतीय दुनिया के अलग-अलग संस्कृतियों और लोगों के साथ काम करने में ज्यादा सहज रहते हैं। साथ ही, इन प्रवासी भारतीयों में अध्ययन के दौरान STEM यानी साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमेटिक्स में रुचि ज्यादा देखी गई है। ऐसे में, अपने इस तरह के अध्ययन के कारण उनके लिए बड़ी तकनीकी कंपनियों को ज्वाइन करना आसान हो जाता है। इसके अलावा, ज्यादातर भारतीय अमेरिकी टेक कंपनियों में लगभग एक जैसे काम का रास्ता चुनते हैं। वे कंपनी में बतौर इंजिनियर शुरुआत करते हैं और उसके बाद प्रोडक्ट मैनेजर बनते हैं, अलग-अलग कंपनियों और अलग-अलग प्रोडक्ट पर काम करने से उनकी कारोबार करने की समझ बढ़ती है और वे मैनेजमेंट के ऊंचे पद तक पहुंचने में कामयाब रहते हैं।