‘पॉइजन पिल’ नीति ('Poison Pill' Policy) : डेली करेंट अफेयर्स

पिछले कुछ दिनों से दिग्गज माइक्रोब्लॉगिंग और सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म ट्विटर के अधिग्रहण को लेकर शह और मात का खेल मीडिया की सुर्खियों में बना हुआ है। दुनिया के सबसे अमीर आदमी एलन मस्क इसका अधिग्रहण करना चाह रहे हैं, जबकि कंपनी के निदेशक बोर्ड इसे अधिग्रहित होने से बचाना चाहते हैं। हाल ही में, ट्विटर का निदेशक बोर्ड इसे बचाने के लिए अपने अंतिम विकल्प तक आ गया जिसका नाम है ‘पॉइजन पिल’ यानी ‘जहर की गोली’।

दरअसल एलन मस्क ने टि्वटर को खरीदने के लिए ऑफर दिया है। हालांकि टि्वटर का बोर्ड इस डील के खिलाफ है। कथित तौर पर इसे और अधिक कठिन बनाने के लिए कंपनी के बोर्ड ने प्वाइजन पिल रणनीति अपनाई है। ‘प्वाइजन पिल’ दरअसल जासूसी की दुनिया से लिया गया एक शब्द है। दुश्मन द्वारा पकड़े जाने पर प्वाइजन पिल खाकर जासूस अपनी जिंदगी खत्म कर लेते थे, ताकि कोई उनसे पूछताछ न कर सके। कुछ ऐसा ही कांसेप्ट अर्थव्यवस्था में अधिग्रहण और विलय को लेकर भी है। इसमें कंपनी अपने शेयर के दाम खुद ही कुछ कम कर देती है और साथ ही यह भी तय कर देती है कि कोई भी व्यक्ति कंपनी में एक निश्चित सीमा से अधिक हिस्सेदारी नहीं खरीद सकता।

इकोनॉमिक्स की भाषा में कहें तो 'पॉइज़न पिल' किसी कंपनी को जबरन अधिग्रहण से बचाने का एक तरीक़ा है। ध्यान दीजिएगा कि किसी कंपनी के टेकओवर को जबरन तब माना जाता है जब कंपनी को उसके प्रबंधन की मर्ज़ी के बिना अधिग्रहित करने की कोशिश की जाए। इस तरह 'पॉइज़न पिल' एक सीमित अवधि की शेयरधारक अधिकार योजना है। इसके तहत कोई भी कंपनी में 15 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी नहीं खरीद सकता। इसमें कंपनी कुछ छूट के साथ दूसरों को कंपनी के अतिरिक्त शेयर खरीदने की अनुमति दे देती है। इससे अधिग्रहण करने की कोशिश करनेवाले के शेयरों की क़ीमत कम हो जाती है और अधिग्रहण मुश्किल हो जाता है। साथ ही कंपनी का अधिग्रहण करने की कीमत बढ़ जाती है।

मौजूदा वक़्त में मस्क के पास ट्विटर के लगभग नौ प्रतिशत शेयर हैं। अब जब ट्विटर बोर्ड ने 'पाइजन पिल' रणनीति को अपनाया है तो इससे एलान मस्क को छोड़कर मौजूदा ट्विटर शेयरधारकों को छूट पर अतिरिक्त शेयर खरीदने की अनुमति मिल जाएगी। इससे कंपनी में मस्क की हिस्सेदारी कम हो जाएगी और अधिग्रहण के पक्ष में शेयरधारकों के ज्यादातर वोटों को अपने पक्ष में हासिल करना उनके लिए कठिन हो जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह तरीका अक्सर काम तो कर जाता है, लेकिन हमेशा काम करे इस बात की गारंटी नहीं होती है।