राजनीतिक शब्दावली (Polity Terms) : डेली करेंट अफेयर्स

राजनीतिक शब्दावली (Polity Terms)

धन्यवाद प्रस्तावः

राष्ट्रपति के विशेष अभिभाषण के पश्चात राष्ट्रपति को धन्यवाद ज्ञापित करन के लिए सरकार द्वारा संसद के प्रत्येक सदन में धन्यवाद प्रस्ताव लाया जाता है। प्रस्ताव के पारित होने पर यह माना जाता है कि सरकार को सदन का विश्वास प्राप्त है किन्तु यदि लोकसभा प्रस्ताव अस्वीकृत कर दे तो सरकार को त्यागपत्र देना पड़ता है।

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व्यवस्था का प्रश्नः

जब संसद में किसी कार्यवाही के दौरान संसदीय प्रक्रिया के किसी नियम का उल्लंघन किया जाता है तब संसद का कोई सदस्य व्यवस्था का प्रश्न उठा सकता है। यह सदन का ध्यान आकर्षित करने की एक असाधारण प्रक्रिया है क्योंकि इसके उठाये जाने पर सदन की कार्यवाही निलम्बित हो जाती है। यह प्रश्न सामान्यतः विपक्ष के द्वारा सरकार पर नियंत्रण के लिए उठाया जाता है। कोई प्रश्न व्यवस्था का प्रश्न है या नहीं इसका निर्धारण पीठासीन अधिकारी द्वारा किया जाता है।

प्रश्न कालः

सामान्यतया प्रतिदिन संसद के दोनों सदनों में बैठक का प्रथम घंटा (दोपहर 11 से 12 बजे तक) प्रश्न काल होता है। भारत में संसदीय प्रश्न पूछने की प्रक्रिया सर्वप्रथम 1890 के भारतीय परिषद अधिनियम द्वारा शुरू हुई थी।

वित्त आयोगः

वित्त आयोग संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत संवैधानिक निकाय है। राष्ट्रपति द्वारा प्रत्येक 5 वर्ष में इसका गठन किया जाता है। इसमें एक अध्यक्ष और चार अन्य सदस्य होते है जिनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। अध्यक्ष व सदस्य बनने के लिए निम्नलिखित योग्यता होना आवश्यक है-

अध्यक्षः सार्वजनिक मामलों का अनुभव

सदस्य –

  • उच्च न्यायालय का न्यायाधीश हो
  • सरकार के वित्त और लेखा का ज्ञान हो
  • वित्तीय प्रशासन में अनुभव हो

वित्त आयोग एक सलाहकारी निकाय है इसकी सिफारिशे बाध्यकारी नहीं होती है। इसे दीवानी न्यायालय का दर्जा प्राप्त है।

प्रस्तावना और उद्देश्य प्रस्तावः

भारतीय संविधान की प्रस्तावना जवाहरलाल नेहरू द्वारा प्रस्तुत उद्देशिका प्रस्ताव या उद्देश्य प्रस्ताव पर आधारित है जिसे 13 दिसंबर 1946 को प्रस्तुत किया गया था। इस उद्देश्य प्रस्ताव से स्वतंत्रता, संप्रभुता, गणराज्य की संकल्पना ली गई है।

भारतीय संविधान की प्रस्तावना की संकल्पना अमेरिका से लिया गया। जबकि भाषा ऑस्ट्रेलिया से ली गई। 42वें संविधान संशोधन अधिनियम 1976 द्वारा प्रस्तावना में संशोधन कर समाजवादी, पंथनिरपेक्ष व अखण्डता शब्द जोड़े गये।

केशवानन्द भारती वाद- 1973 द्वारा प्रस्तावना को संविधान का भाग माना गया। प्रस्तावना न्यायोचित नहीं है अर्थात् इसके आधार पर कोई निर्णय नहीं दिया जा सकता है।