भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए प्रोजेक्ट उड़ान ऐप (Project Udaan App for Linguistic Minorities) : डेली करेंट अफेयर्स

भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए शुरू किए गए प्रोजेक्ट उड़ान का क्या है मक़सद

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी - बॉम्बे यानि आई आई टी बॉम्बे के प्रोफ़ेसर रामकृष्णन और उनकी टीम ने भाषाई अल्पसंख्यकों को भाषाई स्तर पर मदद पहुँचाने के लिए एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित ट्रांसलेशन  ऐप विकसित किया है । इसके लिए जरूरी सॉफ्टवेयर का विकास हाल में किया गया है जिसे प्रोजेक्ट उड़ान के नाम से जानते हैं। यह सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग टेक्स्ट्स बुक और लर्निंग मैटेरियल को बहुत ही कम समय में अनुवाद कर देने में सक्षम है। भाषाई विशेषज्ञ हाथ से यानी मेन्यूअली ऐसा अनुवाद करने में जितना समय लगाएगा उससे बहुत जल्दी प्रोजेक्ट उड़ान सॉफ्टवेयर मैटर का अनुवाद कर देगा।

प्रोजेक्ट उड़ान वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दावली को अंग्रेजी के अलावा कई भाषाओं में अनुवाद करने में मददगार साबित होगा। अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद के साथ कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद करने में सक्षम यह पहल भारतीय संविधान के  भाषाई अल्पसंख्यकों से जुड़े प्रावधानों ( अनुच्छेदों) के उद्देश्यों की प्राप्ति में मददगार साबित होगा। 

प्रोजेक्ट उड़ान के जरिये IIT bombay की टीम ने यह लक्ष्य बनाया है कि उनके इस पहल के लिए उन्हें जो भी डोनेशन मिलेगा उससे 500 इंजीनियरिंग टेक्स्ट बुक्स को अगले 1 साल में हिंदी भाषा में  और अगले 3 साल में 15 भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया जाएगा।

ग़ौरतलब है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 350 ख में भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए एक विशेष अधिकारी का प्रावधान किया गया जिन्हें भारत के भाषाई अल्पसंख्यकों के आयुक्त के रूप में जाना जाता है तथा जिन्हें संविधान में भारत के भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए उपबंधित रक्षोपायों ( सेफगार्ड) से संबंधित सभी मामलों का अन्वेषण करना होता है।

अनुच्छेद 350 A का उद्देश्य है कि राज्य की ओर से भाषाई अल्पसंख्यक समूहों को प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा देने के लिए पर्याप्त सुविधाएं प्रदान करने का प्रयास किया जाए। इसका मतलब है कि अनुच्छेद 350 A कहता है कि विशिष्ट भाषाई अल्पसंख्यक समूहों के बच्चों को उनकी मातृभाषा में निर्देश दिए जाते हैं। 

इस प्रकार संविधान के अनुच्छेद 350 A का मकसद विशिष्ट भाषाई अल्पसंख्यक समूहों के बच्चों को उन्हीं की मातृभाषा में ‌शिक्षा प्रदान कर कौशल का विकास करना है। यदि उनकी मातृभाषा में श‌िक्षा दी जाती है, तो यह उनके लिए अधिक ग्रहणशील होगा। प्रोजेक्ट उड़ान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 350 A के आदर्शों को पूरा करने में मददगार साबित होगा ऐसा आई आई टी बॉम्बे की टीम का मानना है।

भारत में भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकार संरक्षण के अन्य प्रयास :

  • राष्ट्रीय भाषाई अल्पसंख्यक आयोग भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए उपलब्ध सुरक्षा उपायों से संबंधित सभी मामलों की जाँच करता है एवं तत्पश्चात इसकी रिपोर्ट राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत करता है। 
  • वर्ष 1992 में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 के अधिनियमन के साथ ही अल्पसंख्यक आयोग एक सांविधिक/वैधानिक (Statutory) निकाय बन गया और इसका नाम बदलकर राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग कर दिया गया था।
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 29 और 30 में भाषाई अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों के संरक्षण की भी बात की गई है ।

अनुच्छेद 29: यह अनुच्छेद उपबंध करता है कि भारत के राज्य क्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किसी अनुभाग को अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति को बनाए रखने का अधिकार होगा।

अनुच्छेद-29 के तहत प्रदान किये गए अधिकार अल्पसंख्यक तथा बहुसंख्यक दोनों को प्राप्त हैं।

हालाँकि सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि इस लेख का दायरा केवल अल्पसंख्यकों तक ही सीमित नहीं है, क्योंकि अनुच्छेद में 'नागरिकों के वर्ग' शब्द के उपयोग में अल्पसंख्यकों के साथ-साथ बहुसंख्यक भी शामिल हैं।

अनुच्छेद 30:  धर्म या भाषा पर आधारित सभी अल्पसंख्यक वर्गों को अपनी रुचि की शिक्षा, संस्थानों की स्थापना और प्रशासन का अधिकार होगा।

अनुच्छेद 30 के तहत संरक्षण केवल अल्पसंख्यकों (धार्मिक या भाषायी) तक ही सीमित है और नागरिकों के किसी भी वर्ग  (जैसा कि अनुच्छेद 29 के तहत) तक विस्तारित नहीं किया जा सकता।