राजीव कुमार : नए मुख्य निर्वाचन आयुक्त (Rajeev Kumar: New Chief Election Commissioner) : डेली करेंट अफेयर्स

भारत को हमेशा इस बात पर गर्व रहा है कि वह दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। देश के इस गुरुर को बनाए रखने में सबसे अहम भूमिका रही है भारतीय निर्वाचन आयोग की। इस निर्वाचन आयोग को संचालित करने का काम करते हैं इसके तीन आयुक्त, जिसमें एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त होता है। मूल बात यह है कि राजीव कुमार को देश का अगला मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया है।

दरअसल मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा 14 मई को अपने पद से रिटायर हो रहे हैं। इसी को देखते हुए देश का अगला मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार को नियुक्त किया गया है। राजीव कुमार 15 मई को अपना कार्यभार संभालेंगे। इनकी नियुक्ति को लेकर विधि मंत्रालय की तरफ से अधिसूचना जारी कर दी गई है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राजीव कुमार की नियुक्ति की है। ग़ौरतलब है कि राजीव कुमार को 1 सितंबर 2020 को चुनाव आयुक्त बनाया गया था। वे बिहार/झारखंड कैडर के 1984 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी हैं और फरवरी 2020 में भारतीय प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्त हुए थे।

भारत में निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक निकाय है, जो भारत के संविधान में बताये गए नियमों और क़ानूनों के मुताबिक भारत में चुनाव कराने के लिए जिम्मेदार है। इसे 25 जनवरी 1950 को स्थापित किया गया था। वर्तमान में, इसमें एक मुख्य चुनाव आयुक्त और दो अन्य चुनाव आयुक्त शामिल हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त और उसकी सलाह पर अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यकाल 6 साल या 65 वर्ष की आयु (इनमें से जो भी पहले हो) तक होता है। इन सभी चुनाव आयुक्तों को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के समान वेतन और भत्ते मिलते हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त को केवल संसद द्वारा महाभियोग के माध्यम से राष्ट्रपति द्वारा ही हटाया जा सकता है।

निर्वाचन आयोग के कई प्रमुख काम होते हैं मसलन चुनाव की निगरानी, निर्देशन और आयोजन आदि। आयोग राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए हर चुनाव से पहले आदर्श आचार-संहिता जारी करता है ताकि लोकतंत्र की शोभा बनी रहे। यह राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, संसद और राज्य विधानसभा के चुनाव करवाता है। इस प्रक्रिया में आयोग मतदाताओं की नामावली तैयार करने, राजनीतिक पार्टियों का पंजीकरण करने, इन पार्टियों का राज्य/राष्ट्रीय पार्टी के रूप में वर्गीकरण करने, सांसद/विधायक की अयोग्यता पर राष्ट्रपति/राज्यपाल को सलाह देने और चुनाव में गलत तरीकों का इस्तेमाल करने वाले उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित करने जैसे महत्वपूर्ण काम करता है। इसमें चुनाव आयोग की कुछ अर्द्ध-न्यायिक जिम्मेदारियां भी हैं जैसे अनुच्छेद 103 के अंतर्गत राष्ट्रपति संसद के सदस्यों की अयोग्यताओं के संबंध में निर्वाचन आयोग से परामर्श करता है। कुल मिलाकर भारतीय निर्वाचन आयोग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए जिम्मेदार है।

वर्षों से चुनाव आयोग ने लोकतंत्र को मजबूत करने और चुनाव की निष्पक्षता बढ़ाने के लिए कई प्रशंसनीय चुनावी सुधार किए हैं। ये सुधार काफी पर्याप्त और सराहनीय हैं। इसके बावजूद, किसी भी व्यवस्था में सुधार की गुंजाइश हमेशा रहती है। द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (2nd ARC) ने अपनी चौथी रिपोर्ट ‘शासन में नैतिकता’ में कहा है कि भारतीय निर्वाचन आयोग के अध्यक्ष तथा अन्य सदस्यों की नियुक्ति करने के लिए प्रधानमंत्री के नेतृत्व में एक कॉलेजियम की व्यवस्था की जानी चाहिए। साथ ही, न्यायालय ने भी माना है कि अब तक मुख्य चुनाव आयुक्त तथा अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति निष्पक्ष और राजनीतिक रूप से तटस्थ रही है, परंतु फिर भी विधि में शून्यता को शीघ्र ही भरा जाना चाहिए।