सेमीकॉन इंडिया सम्मेलन 2022 (Semicon India Conference 2022) : डेली करेंट अफेयर्स

अभी हाल के दिनों में समाचारों में सेमीकंडक्टर का नाम जरूर सुना होगा। कंप्यूटर, लैपटॉप, कार, वॉशिंग मशीन, ATM और अस्पतालों की मशीन से लेकर हाथ में मौजूद स्मार्टफोन तक यह सभी सेमीकंडक्टर की मदद से ही काम करते हैं। जैसे हम इंसानों में हमारा खुद का दिमाग होता है उसी तरह सेमीकंडक्टर को इन मशीनों का दिमाग कहा जा सकता है। मौजूदा वक्त में हम जिस तरह से तकनीक पर निर्भर हुए हैं, ऐसे में अगर इस सेमीकंडक्टर का उत्पादन कम हो जाए तो हमारे जीवन गति पर भी ब्रेक सा लग जाता है। इसीलिए इसके उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए हाल ही में बेंगलुरु में एक सेमीकॉन इंडिया सम्मेलन-2022 का आयोजन किया जा रहा है।

सेमीकंडक्टर चिप्स सिलिकॉन से बने होते हैं और किसी भी विद्युत सर्किट में इलेक्ट्रिसिटी नियंत्रित करने के काम आते हैं। ये न ही विद्युत के पूरी तरह से कुचालक होते हैं और न ही पूरी तरीके से सुचालक। दूसरे शब्दों में कहें तो यह इलेक्ट्रॉनिक सामानों को ऑटोमेटिक तौर पर चलाने में मदद करती हैं। उदाहरण के तौर पर, स्मार्ट वॉशिंग मशीन में कपड़े पूरी तरह धुल जाने के बाद मशीन अपने आप बंद हो जाती है।

अब अचानक इसकी कमी कैसे आ गई? दरअसल कोरोना की वजह से लगे लॉकडाउन के बाद से दुनियाभर में सेमीकंडक्टर चिप्स की कमी शुरू हो गई थी। हुआ यूं कि लॉकडाउन की वजह से सामानों और उत्पादों की मांग में कमी आ गई। इसके कारण चिप्स का उत्पादन भी कम होने लगा। जैसे ही लॉकडाउन खुला तो इलेक्ट्रॉनिक सामानों की मांग अचानक से बढ़ गई। अचानक से बढ़ी इस मांग की वजह से मांग और आपूर्ति के बीच अंतर बढ़ गया। इसका परिणाम यह हुआ कि बाजार में सेमीकंडक्टर चिप्स की कमी आ गई। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कमी मौजूदा पूरे साल तक बनी रह सकती है।

इसी समस्या से निपटने के लिए भारत सरकार ने देश में ही सेमीकंडक्टर चिप निर्माण को बढ़ावा देने के मकसद से 76 हजार करोड़ रुपए की महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत अगले 6 साल में देश में सेमीकंडक्टर चिप निर्माण के लिए एक वातावरण तैयार किया जाएगा। इसी क्रम में बीते 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेंगलुरु में भारत के पहले सेमीकॉन इंडिया-2022 सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस सम्मेलन का आयोजन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा 29 अप्रैल से 1 मई तक आईटीसी गार्डेनिया, बेंगलुरु में किया जा रहा है। इसकी थीम - डिजाइन एंड मैन्युफैक्चर इन इंडिया, फॉर द वर्ल्ड : मेकिंग इंडिया ए “सेमीकंडक्टर नेशन” है। इसका उद्द्येश्य भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण, सेमीकंडक्टर डिजाइन, निर्माण और नवाचार में आगे बढ़ाना है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सेमीकंडक्टर चिप्स के निर्माण को बढ़ावा देने से रोजगार को बढ़ावा मिलेगा और महंगाई में कमी आएगी। दरअसल मौजूदा वक्त में देश में उत्पादन ना होने की वजह से हम करीब 1.76 लाख करोड़ रुपए के मूल्य का सेमीकंडक्टर चिप बाहर से आयात करते हैं। अंदाजा है कि साल 2025 तक यह आयात बढ़कर लगभग 7.5 लाख करोड़ रुपए हो जाएगा। ऐसे में, अगर हम सेमीकंडक्टर चिप का उत्पादन देश में ही करें तो हमें आयात पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। साथ ही निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा। सेमीकंडक्टर चिप को बाहर से आयात करने की वजह से इलेक्ट्रॉनिक सामानों का दाम काफी बढ़ गया है। अगर इन्हें देश में ही बनाया जाएगा, तो यह सामान सस्ते हो सकते हैं। अनुमान के मुताबिक, सेमीकंडक्टर को डिजाइन करने के लिए आने वाले समय में करीब 85 हजार इंजीनियर्स की जरूरत पड़ेगी। इनके अलावा, तमाम छोटे-बड़े पदों के लिए भी नौकरियां पैदा होंगी। सरकार की मौजूदा योजना के तहत इंसेंटिव मिलने से जो कंपनियां दक्षिण कोरिया, चीन और ताइवान में अपने प्लांट्स स्थापित कर रही हैं, उम्मीद है कि वो भारत में अपनी इकाई स्थापित करना चाहेंगी। अभी मौजूदा वक्त में चंडीगढ़ में ISRO की और बेंगलुरु में DRDO की चिप फैक्ट्री है। कुछ दिनों पहले टाटा ग्रुप ने भी सेमीकंडक्टर बनाने के क्षेत्र में उतरने का ऐलान किया है।

सेमीकंडक्टर चिप्स को घरेलू स्तर पर बनाने की कोशिश पहले भी हो चुकी है, लेकिन खराब प्लानिंग की वजह से यह कोशिश इच्छित परिणाम नहीं दे पाई थी। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को पिछले अनुभवों से सीख लेते हुए इस नई योजना को बेहतर तरीके से क्रियान्वित करना होगा।