क्या है छठा सामूहिक विलोपन/विलुप्ति? (What is the Sixth Mass Extinction?) : डेली करेंट अफेयर्स

Sixth mass extinction को Anthropocene extinction भी कहा जा रहा है , जिसका मतलब है कि वन्य जीवों , वनस्पतियों का अब जो वर्तमान समय में सामूहिक विलुप्ति का शिकार हो रहे हैं , उनका कारण मानवों की गतिविधियां हैं , इसे दूसरे शब्दों कहते हैं कि मानव हस्तक्षेप के चलते 6 वें सामूहिक विलोपन को बढ़ावा मिलेगा।

ऐसा इसलिए होगा क्योंकि सर्वाधिक गंभीर पर्यावरणीय आपदाएं चुनौतियां स्थाई प्रकृति की हो जाएंगी यानी कि अक्सर भूकंप ज्वालामुखी का फटना, सुनामी और अन्य आपदाएं देखने को मिलेंगे। यह भी संभव हो सकता है कि कोई क्षुद्रग्रह या उल्कापिंड का टुकड़ा टूट कर पृथ्वी पर गिरे और विभिन्न प्रजातियों का सफाया करें।

हाल ही में UH Manoa Pacific Biosciences Research Center in the School of Ocean and Earth Science and Technology (SOEST) की छठे सामूहिक विलोपन से जुड़ा अध्ययन बायोलॉजिकल रिव्यू जर्नल में प्रकाशित हुआ है जिसमें वैज्ञानिकों ने लिखा है कि धरती पर से करीब 13 फीसदी अकशेरुकीय प्रजातियों (Invertebrate Species) के जीव पिछले 500 सालों में खत्म हो चुके हैं। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर यही प्रक्रिया चलती रही तो जल्द ही जैव-विविधता में भयानक स्तर की गिरावट होगी। जिन 13 फीसदी जीवों की बात हो रही है, उनके बारे में इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजरवेशन ऑफ नेचर (IUCN) की रेड लिस्ट ऑफ थ्रेटेंड स्पीसीज (Red List of Threatened Species) में जिक्र भी है. जिन जीवों की प्रजातियां खतरे में हैं, वो इस लिस्ट में शामिल होती हैं।

इस स्टडी में बताया गया था कि धरती पर पाए जाने वाले घोंघे (Snails) की 7 फीसदी आबादी तो साल 1500 से अब तक खत्म हो चुकी है। यह तो जमीन पर रहने वाले एक अकशेरुकीय प्रजाति (Invertebrate Species) का जीव है। समुद्र में यह दर बहुत ज्यादा है। जमीन और समुद्र मिलाकर देखा जाए तो इस प्रजाति के 7.5 से 13 फीसदी जीव खत्म हो चुके हैं। यानी करीब 20 लाख वो मोलस्क जिनके बारे में वैज्ञानिकों को पता था या है।

6वें mass extinction के पहले हुए पांचों सामूहिक विलोपनों का कारण था खतरनाक ज्वालामुखी विस्फोट, महासागरों में ऑक्सीजन का क्षरण और उल्का पिंडों का धरती से टकराना।

444 मिलियन वर्ष पूर्व Ordovician युग में पहले सामूहिक विलोपन की घटना घटी थी जिसमें 86 प्रतिशत प्रजातियों का धरती से सफाया हो गया था। बहुत गंभीर हिम युग ( ice age ) ने समुद्र के स्तर को निम्न कर दिया था।

दूसरे सामूहिक विलोपन की घटना डेवोनियन ( Devonian era) में 383 से 359 मिलियन वर्ष पहले घटी थी जिसमें 75 प्रतिशत प्रजातियों का सफाया हो गया था।

इसके बाद तीसरे सामूहिक विलोपन की घटना पर्मियन ( Permian) युग में हुई थी और यह घटना 252 मिलियन वर्ष पूर्व घटित हुई थी जिसमें लगभग 96 प्रतिशत प्रजातियों का सफाया हो गया था।

चौथे सामूहिक विलोपन की प्रक्रिया ट्रियासिक ( Triassic) युग में 201 मिलियन वर्ष पूर्व हुई थी जिसमें 80 प्रतिशत प्रजातियों का सफाया हो गया था।

और इसके बाद छठ में सामूहिक विलोपन की प्रक्रिया फ्री टेस्ट इस युग में 66 मिलियन वर्ष पूर्व घटित हुई थी जिसमें उल्कापिंडों के पृथ्वी से टकराने , ज्वालामुखी गतिविधियों और जलवायु परिवर्तन के चलते 76 प्रतिशत प्रजातियों का सफाया हो गया है।