क्या है यह शिगेला? (What is this Shigella?) : डेली करेंट अफेयर्स

पिछले दिनों केरल में एक ढाबे का खाना खाने के बाद 58 लोग बीमार हो गए और एक लड़की की मौत हो गई। इसके बाद सभी संक्रमित लोगों में से पांच रोगियों के नमूने जांच के लिए कोझिकोड मेडिकल कॉलेज भेजे गए और उनमें से तीन की रिपोर्ट में शिगेला बैक्टीरिया से संक्रमण की पुष्टि हुई है।

इस बैक्टीरिया के प्रकाश में आने के बाद लोगों में भय की स्थिति बनी हुई है। ऐसा नहीं है कि शिगेला बैक्टीरिया पहली बार रिपोर्ट किया गया है, बल्कि इससे पहले भी शिगेला के मामले सामने आते रहे हैं। शिगेला बीमारी शिगेला नाम के बैक्टीरिया के कारण होती है। वैसे तो कोई भी इसकी चपेट में आ सकता है, लेकिन 10 साल से कम उम्र के बच्चों को यह बैक्टीरिया ज्यादा प्रभावित करता है। यह इंसान के आँतों को संक्रमित करता है।

दूषित पानी पीने, बासी खाना खाने और शिगेला से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से कोई भी व्यक्ति इस बैक्टीरिया से संक्रमित हो सकता है। यानी यह एक संक्रामक बीमारी है। एक बार जब बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर जाता है, तो ये कोलन (मलाशय) के एपिथेलियल लाइनिंग पर अटैक करता है, इसके परिणामस्वरूप कोशिकाओं में सूजन व जलन प्रारंभ हो जाती है और गंभीर मामलों में कोशिकाएँ नष्ट भी हो जाती है।

इस बैक्टीरिया से प्रभावित लोगों को दस्त, बुखार और पेट दर्द आदि की दिक्कत होती है। कई बार खूनी दस्त भी होता है और कई बार इसके लक्षण नजर नहीं भी आते हैं। आमतौर पर शिगेला जानलेवा या बहुत गंभीर नहीं होता है। बात अगर इसके इलाज की करें तो अभी मौजूदा वक्त में इसके लिए कोई टीका नहीं बना है। डॉक्टर आमतौर पर एंटीबायोटिक्स दवाओं का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा, इस पर काबू पाने के लिए स्वच्छता अहम कारक है, इसीलिए शिगेला से बचने के लिए डॉक्टर बार-बार साबुन से हाथ धोने की सलाह देते हैं। घनी आबादी में रहने वाले लोगों को गुनगुना पानी पीने की सलाह दी जाती है। साथ ही, खाना ठीक से पकाने से भी बैक्टीरिया मर जाते हैं। ज्यादातर मामलों में ज्यादा से ज्यादा मात्रा में तरल पदार्थ लेना यानी लिक्विड डाइट और आराम करने से मरीज को फायदा मिल सकता है।