अंतर्राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा अधिकार दिवस 2022 (World Intellectual Property Day 2022) : डेली करेंट अफेयर्स

रचनात्मक मनुष्य की स्वाभाविक वृत्ति है। मानव विकास के लिए यह एक आवश्यक शर्त है। लेकिन अगर किसी की रचनात्मकता को उचित सम्मान ना मिले तो कोई भी इसमें इतनी रुचि नहीं लेना चाहेगा। इसीलिए हर साल 26 अप्रैल को नवाचार एवं रचनात्मकता को बढ़ावा देने और इस संबंध में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से एक बौद्धिक संपदा अधिकार दिवस मनाया जाता है।

सबसे पहला सवाल कि बौद्धिक संपदा क्या होती है? व्यक्तियों के दिमागी उत्पाद से जुड़े अधिकार ही बौद्धिक संपदा अधिकार कहलाते हैं। इसमें साहित्यिक रचना, शोध, आविष्कार जैसी चीज़ें शामिल होती हैं। ऐसा माना जाता है कि जिस इंसान की मेहनत से ये रचनाएँ बनी हैं, सबसे पहले इस पर उसी व्यक्ति का हक़ होना चाहिये। चूँकि यह अधिकार बौद्धिक उत्पाद के लिये दिया जाता है, इसलिए इसे बौद्धिक संपदा अधिकार कहते हैं। बौद्धिक संपदा अधिकार एक निश्चित समयावधि और एक निर्धारित भौगोलिक क्षेत्र के मद्देनजर दिये जाते हैं। ये अधिकार पांच प्रकार के होते हैं- 1) कॉपीराइट, 2) पेटेन्ट, 3) ट्रेडमार्क, 4) औद्योगिक डिज़ाइन और 5) भौगोलिक संकेतक।

दुनियाभर में बौद्धिक संपदा संरक्षण को बढ़ावा देने के लिहाज़ से 1967 में विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) का गठन किया गया था। मौजूदा वक़्त में इसके तहत 26 अंतर्राष्ट्रीय संधियाँ आती हैं और 191 देश इसके सदस्य हैं। इसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड में है। भारत 1975 में WIPO का सदस्य बना था। अब सवाल उठता है कि बौद्धिक संपदा अधिकार दिवस के लिए 26 अप्रैल ही क्यों चुना गया? इसके लिए आपको बता दूं कि साल 1970 में 26 अप्रैल को ही WIPO कन्वेंशन अस्तित्व में आया था। इसीलिए साल 2000 में WIPO के सदस्यों ने इस दिन को बौद्धिक संपदा अधिकार दिवस के रूप में मनाने का फैसला लिया।

बौद्धिक संपदा अधिकारों से जुड़े तमाम अंतरराष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय कंवेन्शन भी बने हैं, जिनमें औद्योगिक संपदा के संरक्षण जुड़ा पेरिस कंवेन्शन (1883), साहित्यिक और कलात्मक कामों के संरक्षण के लिये बर्न कंवेन्शन (1886) और मर्राकेश संधि (2013) आदि शामिल हैं। औद्योगिक संपदा के संरक्षण जुड़े पेरिस कंवेन्शन के तहत ट्रेडमार्क, औद्योगिक डिज़ाइन आविष्कार के पेटेंट शामिल हैं। साहित्यिक और कलात्मक कामों के संरक्षण के लिये बर्न कंवेन्शन के अंतर्गत उपन्यास, लघु कथाएँ, नाटक, गाने, ओपेरा, संगीत, ड्राइंग, पेंटिंग, मूर्तिकला और वास्तुशिल्प शामिल हैं। मर्राकेश संधि के मुताबिक़ किसी किताब को ब्रेल लिपि में छापे जाने पर इसे बौद्धिक सम्पदा का उल्लंघन नहीं माना जाएगा। इस संधि को अपनाने वाला भारत पहला देश है।

बौद्धिक संपदा अधिकारों के संरक्षण एवं इस बारे में जागरूकता फैलाने के लिए भारत में भी कई कानून एवं नीतियां बनाई गई हैं। जिसमें पेटेंट अधिनियम 1970 और पेटेंट (संशोधन) एक्ट 2005, ट्रेडमार्क एक्ट 1999, कॉपीराइट एक्ट 1957 और कॉपीराइट (संशोधन) एक्ट 1999, वस्तुओं का भौगोलिक संकेतन (पंजीकरण और संरक्षण) एक्ट 1999 और डिजाइन एक्ट, 2000 आदि शामिल है। इसके अलावा, 12 मई, 2016 को भारत सरकार ने राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा अधिकार नीति को भी मंज़ूरी दी थी जिसके जरिए भारत में बौद्धिक संपदा को संरक्षण और प्रोत्साहन दिया जाता है।

अपने इन्हीं प्रयासों के चलते भारत ने हाल ही में जारी अपने समग्र अंतर्राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा (IIP) स्कोर में 38.4% से 38.6% तक सुधार किया है और इसके परिणामस्वरूप भारत अंतर्राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा सूचकांक 2022 में 55 देशों में से 43वें स्थान पर पहुँच गया। इसके अलावा, आपको बता दें कि हर साल इस दिवस की एक थीम होती है। साल 2022 के लिए विश्व बौद्धिक संपदा अधिकार दिवस की थीम - 'IP and Youth Innovating for a Better Future' है। अगर इसे हिंदी में ट्रांसलेट करें तो यह ‘बौद्धिक संपदा एवं बेहतर भविष्य के लिए नवाचार करते हुए युवा’ होगा।